सावन माह में विशेष-

बिहारेश्वर मंदिर में, मराठा क्षत्रप शिवाजी ने पाई थी पनाह
निबियाखेड़ा गांव में विराजते हैं भद्रेश्वर महादेव

अपने आप पूजित मिलता है औलियाश्वर शिवलिंग
अवध दीक्षित
कानपुर। पर्यटन के नक्शे में कानपुर जनपद धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों का केंद्रबिंदु है। जिसमें घाटमपुर तहसील क्षेत्र में भी कई प्राचीन और ऐतिहासिक शिवालय शामिल हैं। इनमें सजेती क्षेत्र के अज्योरी ग्राम में सम्राट अकबर के प्रिय मंत्री बीरबल का बनवाया हुआ बिहारेश्वर महादेव मंदिर काफी प्रसिद्ध है। कानपुर-सागर राजमार्ग के किनारे स्थित इस मंदिर का निर्माण मुगल काल में कराया गया था।

बता दें कि, अकबर के प्रिय एवं हाजिर जवाब मंत्री बीरबल सजेती क्षेत्र के ही दहिलर गांव में पले बढ़े थे। यहां पर उनका ननिहाल था। रोजी-रोटी के लिए वह दिल्ली दरबार में पहुंचे थे। जहां उनकी प्रतिभा के चलते उन्हें मंत्री पद दिया गया।
बिहारेश्वर महादेव मंदिर में स्थापित शिवलिंग काफी भव्य एवं आकर्षक है। मंदिर के मुख्यद्वार पर लगा शिलापट भी अपने आप में अनोखा है। जिसके बारे में स्थानीय लोग बताते हैं कि इसे जितनी बार नापा जाता है। उतनी बार ही नाप घट-बढ़ जाती है।
वहीं, साढ़ क्षेत्र के रिंद नदी के तट पर स्थित करचुलीपुर गांव में औलियाश्वर महादेव का मंदिर है। इसके बारे में मान्यता है कि सुबह मंदिर के पट खुलने पर शिवलिंग स्वतः पूजित मिलता है। स्थानीय लोग मानते हैं कि शिवलिंग की पूजा करने के लिए महाभारत काल में अमर हुए अश्वत्थामा आते हैं।
इसी तरह मुगल रोड के किनारे स्थित निबियाखेड़ा गांव में भद्रेश्वर का महादेव मंदिर है जो ईंटों से निर्मित है। इसका निर्माण काल 9वीं शताब्दी का बताया जाता है। मंदिर में स्थापित शिवलिंग काफी भव्य है।
तहसील क्षेत्र की यमुनापट्टी के सिधौल गांव में मारकंडेयश्वर महादेव का शिवालय स्थित है। इसमें आजतक कोई भी छत नहीं डलवा पाया है।
जबकि, कस्बा पतारा में बाबा बैजनाथ धाम का प्राचीन मंदिर है। जिसका वर्णन परिमाल रासो (आल्हा खंड) में भी मिलता है।
इसी तरह पतरसा गांव में पातालेश्वर महादेव मंदिर, नन्दना गांव में रामेश्वर महादेव मंदिर, रतनपुर गांव में रत्नेश्वर महादेव मंदिर के साथ ही पालपुर, चंवर, बरनांव और परौली गांवों में भी कई प्राचीन शिव मंदिर हैं। जिनकी दूर-दूर तक महत्ता है।

