जगदीश श्रीवास्तव
हमीरपुर। जिले का स्वास्थ्य विभाग खुद ही ‘आईसीयू’ में पहुंच चुका है। सरकारी दावों और योजनाओं के बावजूद ज़मीनी हकीकत बेहद चिंताजनक है। स्वास्थ्य केंद्रों पर अव्यवस्था, कर्मचारियों की गैरहाज़िरी, मरीजों से अवैध वसूली और भ्रष्टाचार की लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं।
ताज़ा मामला मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय का है, जहां तैनात स्वास्थ्यकर्मी पुष्पेंद्र को एंटी करप्शन टीम ने खुलेआम रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया। पूछताछ में पुष्पेंद्र ने दावा किया कि वह नोडल अधिकारी और खुद मुख्य चिकित्सा अधिकारी के लिए कमीशन के रूप में रिश्वत वसूलता था — क्रमशः 50% और 40% का हिस्सा तय बताया गया।
सीएमओ पर उनके पूर्व कार्यकाल के दौरान कन्नौज में भी भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे थे, जिनकी जांच में सत्यता भी पाई गई थी। हमीरपुर के सदर विधायक मनोज प्रजापति ने भी सार्वजनिक रूप से उन पर सवाल उठाए थे। जिलाधिकारी द्वारा प्रदेश सरकार को कार्रवाई हेतु संस्तुति भेजी गई थी, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई। आरोप है कि स्वास्थ्य मंत्री की ‘सरपरस्ती’ के चलते वे पद पर बने हुए हैं।
राठ स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भी हालात बेहद खराब हैं। मरीजों को समय पर न तो डॉक्टर मिलते हैं, न ही उपचार। आरोप हैं कि अधीक्षक महिला चिकित्सकों के प्रति पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाते हैं और अन्य स्टाफ को उनके विरुद्ध भड़काते हैं। यहां सुबह 9 बजे तक कई बार चिकित्सकीय स्टाफ नदारद रहता है। यह सब कुछ सी एम ओ की जानकारी और संरक्षण में हो रहा है।
मुख्यमंत्री द्वारा भ्रष्टाचार के विरुद्ध घोषित ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति जनपद के स्वास्थ्य विभाग में दम तोड़ती नजर आ रही है। जनता की उम्मीदें और जनप्रतिनिधियों की आवाज़ें सब अनसुनी हो रही हैं।
अब निगाहें सरकार पर
जनपद की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की उम्मीद अब केवल शासन की सक्रियता पर टिकी है। सवाल यह है कि क्या सरकार निष्पक्ष जांच और कठोर कार्रवाई कर स्वास्थ्य विभाग को पटरी पर लाएगी, या फिर यह व्यवस्था यूं ही दम तोड़ती रहेगी?

