शैलेन्द्र साहित्य सरोवर की 395वीं काव्य गोष्ठी का हुआ आयोजन

फतेहपुर। शहर के शैलेन्द्र साहित्य सरोवर की 395वीं साप्ताहिक रविवासरीय काव्य गोष्ठी शहर के मुराइन टोला स्थित हनुमान मंदिर में आयोजित हुई। साप्ताहिक रविवासरीय सरस काव्य गोष्ठी का आयोजन के. पी. सिंह कछवाह की अध्यक्षता एवं दिनेश कुमार श्रीवास्तव के संचालन में हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में मंदिर के पुजारी स्वामी भार्गव महाराज उपस्थित रहे।
काव्य गोष्ठी का शुभारंभ करते हुए के० पी० सिंह कछवाह ने वाणी वंदना में अपने भाव प्रसून प्रस्तुत करते हुए कहा- सरस्वती मां आइए, कविजन करें पुकार। कविता में रस छंद भर करो नया श्रृंगार।। पुनः कार्यक्रम को गति देते हुए काव्य पाठ में कुछ इस प्रकार से अपने अंतर्भावों को प्रस्तुत किया- शिव समान दाता नहीं, कोई कृपा निधान। बांटे अपने भक्त को, मनवांछित वरदान।।
डा० सत्य नारायण मिश्र ने अपने भावों को एक छंद के माध्यम से कुछ इस प्रकार व्यक्त किया – सुख के साथी हैं बहुत, दुख में मिले न कोय। जो दुख में दे साथ वह, सच्चा साथी होय।। वहीं दिनेश कुमार श्रीवास्तव ने अपने भावों को मुक्तक में कुछ इस प्रकार पिरोया- श्री कृष्ण चंद्र उदार भजु मन, प्रेम निधि बृजभूषणम्। श्रुति लोल कुंडल, कल कपोल अमोल छवि यदुनायकम्।। प्रदीप कुमार गौड़ ने अपने क्रम में काव्य पाठ में कुछ इस प्रकार भाव प्रस्तुत किये – जीवन में यदि संकट आए, औ अपना मन घबराए। ‘नमः शिवाय’ मंत्र जपने से मनवांछित फल मिल जाए।। डॉ० शिव सागर साहू ने काव्य पाठ में अपने भावों को कुछ इस प्रकार शब्द दिए – नफरत तज सब प्रेम से, रहिए हिंदुस्तान। व्यर्थ न जाने दीजिए, वीरों का वलिदान ।।
काव्य गोष्ठी के आयोजक शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी ने अपने भाव एक गीत के रूप में कुछ यों प्रस्तुत किये- शिव शंकर का रूप ही, यह समस्त संसार। दायित्वों की पूर्ति बिन, हो न सके उद्धार।।
कार्यक्रम के अंत में स्वामी जी ने सभी को आशीर्वाद प्रदान किया। आयोजक की ओर से संचालक दिनेश कुमार श्रीवास्तव ने सभी कवियों एवं आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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