राठ/हमीरपुर। श्री मेला जल विहार समिति राठ के तत्वावधान में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन सोमवार को कथा वाचक मानस माधुरी पाठक (ओरछा धाम) ने भक्त ध्रुव, प्रहलाद, नरसिंह अवतार, भरत चरित्र एवं सृष्टि वर्णन के पावन प्रसंगों का वर्णन कर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
कथा में उन्होंने कहा कि ईश्वर की सच्ची और निष्काम भक्ति ही जीवन का परम लक्ष्य है। ध्रुव चरित्र से यह शिक्षा मिलती है कि विपरीत परिस्थितियों में भी अटूट श्रद्धा से ईश्वर की साधना कर वैकुंठ धाम तक पहुँचा जा सकता है।
प्रहलाद चरित्र में बताया कि गर्भ से ही भक्ति संस्कार मिल जाने पर भक्त बड़े से बड़े कष्ट से भी उबर सकता है। हिरण्यकश्यप के अत्याचारों से रक्षा हेतु भगवान का नरसिंह अवतार इसी का उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि संसार भगवान का सुंदर बगीचा है और मनुष्य को अपने कर्मों के अनुसार ही फल मिलता है। क्रोध, लोभ और मोह को त्यागकर विवेक, वैराग्य व सत्कर्मों से ही मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।
मानस माधुरी पाठक जी ने श्रद्धालुओं को संदेश दिया कि भगवान से मनोकामनाएँ न मांगकर प्रेम और निष्ठा से भक्ति करनी चाहिए, क्योंकि भगवान स्वयं जानते हैं कि किसे क्या आवश्यक है।
कथा पंडाल में भक्तों की भारी भीड़ रही। इस दौरान परीछत बृज भूषण सोनी सहित सैकड़ों श्रद्धालु एवं माताएँ उपस्थित रहीं।
फोटो—–जलबिहार मंदिर में श्रीमद् भागवत कथा
