अखिलेश की पहली रैली- भाजपा के गढ़ में ‘गुर्जर गर्जना’

अखिलेश की पहली रैली- भाजपा के गढ़ में ‘गुर्जर गर्जना’

पीयूष त्रिपाठी
लखनऊ। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए 29 मार्च की तारीख दो ऐसी घटनाओं की गवाह बनी जिससे राजनैतिक व सामाजिक पटल पर नई इबारत लिख गईं एक तो गौतमबुद्धनगर के दादरी में सपा की सामाजिक समानता रैली की धमक और दूसरी अंतर्राष्ट्रीय जाट संसद के कार्यक्रम में जाट शब्द को लेकर हुआ जबरदस्त हंगामा। इन दोनों ही घटनाओं से यूपी की भाजपा सरकार के माथे पर शिकन साफ देखी जा रही है। भाजपा से गुर्जर भी नाराज़ दिखे और जाट भी। समाजवादी पार्टी ने यूपी में 2027 विधानसभा चुनाव की रणभेरी बजा दी है और इसके लिए उसने यूपी के पश्चिमी उत्तर प्रदेश को अपनी आधारशिला बनाया है। यहां के गौतमबुद्धनगर में दादरी में 29 मार्च को हुई गुर्जर गर्जना की अनुगूंज न केवल यूपी के पूर्वी अंतिम छोर तक सुनाई दी है बल्कि उत्तराखंड, दिल्ली व राजस्थान, हरियाणा में भी इसकी प्रतिध्वनि गूंजती दिखी है। यह रैली समानता भाईचारा के नाम से थी लेकिन गुर्जरों के गढ़ में एक तरह से गुर्जर रैली के रूप में प्रचारित की गई थी। रैली तो रैली होती है किसी को रोका नहीं जा सकता लिहाज़ा इस रैली में पाया गया कि सारी जातियों वर्गों ने जमकर भागीदारी की। सपा प्रमुख अखिलेश यादव समेत सभी सपा के बड़े नेता गदगद हैं। समीकरण भी संकेत दे रहे हैं कि अखिलेश की पहली चुनावी रैली स्वतः स्फूर्त रही बिन बुलाये लोगों ने इसमें शिरकत की और तन-मन-धन से सहयोग करने की भावना का जमकर मुजाहरा किया। यहां बतादें कि इस क्षेत्र की 24 विधानसभा ऐसी हैं जहां गुर्जर समुदाय की भागीदारी कहीं 10 हजार तो कहीं 70 हजार तक है। गुर्जरों के दिल को छूने वाली उनकी श्रद्धा की पात्र मिहिर भोज की प्रतिमा को लखनऊ में लगाये जाने वाली घोषणा ने गुर्जरों को भावनात्मक रूप से प्रभावित किया है।

वरिष्ठ पत्रकार चक्रपाणि जी का आंकलन है कि पश्चिमी उत्तर प्रेदश की दम पर यूपी में सरकार बनाने वाली भारतीय जनता पार्टी के होश उड़े हुए हैं। चक्रपाणि जी के अनुसार इस रैली में गौतमबुद्धनगर के अलावा मेरठ, बुलंदशहर, बागपत तक से भीड़ आईं थी। समाजवादी पार्टी ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि रैली में किसी को पार्टी की ओर से वाहन व अन्य सुविधा दे कर नहीं बुलाया जायेगा। इसके बावजूद इतनी भारी भीड़ आने का सीधा सा अर्थ है कि लोगों में बदलाव की भावना है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ही पत्रकार नरेश भाटी का भी यहीं कहना है कि इस पूरे क्षेत्र में गुर्जर भारी संख्या में हैं जो कि राजनैतिक रूप से सक्षम व परिपक्व हैं। हांलाकि उन्होने यह भी कहा कि जहां पर रैली हुई है यानि दादरी में। यह सीट भी सपा कभी नहीं जीती। 2007 और 2012 में बसपा ने बाज़ी मारी थी जबकि 2017 व 2022 में यह भाजपा का गढ़ बन गया। अब यहां के प्रभावशाली जाट नेता जयंत चौधरी व के.सी. त्यागी भाजपा के साथ हैं। अगर जेवर सीट पर देखें तो 2022 में सपा ने 80 हजार वोट पाये थे इस 29 मार्च को हुई रैली के आयोजक प्रमुख राजकुमार भाटी ही प्रत्याशी थे। समाजवादी पार्टी ने सही जगह चुना, जहां से पूरे उत्तर प्रदेश में सपा की आवाज़ पहुंची है। अखिलेश यादव के तथ्यपूर्ण व गंभीर भाषण व आंकड़े प्रस्तुत करने की काबिलियत ने भी लोगों के दिलों को जीता। चुनाव को लेकर कोई भविष्यवाणी करना मुझे ठीक नहीं लग रहा लेकिन यह तय है कि जहां वेस्ट यूपी का जाट गुर्जर लैंड समाप्त होता है वहीं से यादव लैंड भी शुरू हो जाता है। जो कि इस रैली से उत्साहित हो गया है। सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. नीतेन्द्र यादव, वरिष्ठ नेत्री अपर्णा जैन बंसल, युवा सपा नेता मनोज शुक्ल बबलू, लखनऊ के युवा नेता कौस्तुक तिवारी का कहना है कि दादरी रैली पूरी तरह सफल और सार्थक रही है यहां से उठी सपा की लहर आगे जाकर सुनामी बनेगी क्योंकि भाजपा के गढ़ में सपा प्रमुख ने सीधे धावा बोला है। वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एक अन्य खास घटनाक्रम हुआ जो कि यहां के जाटों को नाराज़ कर गया। इस घटनाक्रम की गूंज भी जाटों के अंतिमछोर तक गई मामला फिलहाल तो शांत हो गया लेकिन जाटों के मन में क्लेश घोल गया। हुआ यह कि मेरठ में सूरजमल की प्रतिमा अनावरण समारोह में हंगामा हो गया। महाराज सूरजमल की प्रतिमा की फाउंडेशन वॉल से जाट शब्द हटाने पर लोग भड़क गए। बिरादरी के लोग धरने पर बैठकर हंगामा करने लगे। लोगों का कहना है कि पुलिस-प्रशासन जान बूझकर हमारे समाज को नकार रहा है। हमारे महाराजा श्री का अपमान किया जा रहा है। इसलिए इरादतन प्रतिमा के नीचे जो जाट शब्द लिखा था, उसको पुलिस ने रातों-रात हटवाया गया। हम इस तरह अपना अपमान बर्दाश्त नहीं करेंगे। करीब 45 मिनट तक प्रदर्शन चला। इसके बाद एसडीएम सरधना उदित नारायण वहां पहुंचे। उन्होंने लोगों को समझाया। इसके बाद लोगों ने धरना प्रदर्शन खत्म किया। इसी बीच पता चला कि जाट शब्द वाली प्लेट कहीं खो गई। इससे पहले पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह और राजस्थान के नागौर से सांसद हनुमान बेनिवाल सकौती के हितकारी इंटर कॉलेज पहुंचे। महाराजा सूरजमल की प्रतिमा का अनावरण करने जैसे ही बढ़े, तभी भीड़ टूट पड़ी। इससे भगवंत मान आगे नहीं बढ़ पाए। बिना अनावरण के ही वापस लौटना पड़ा। मान के जाने के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान ने महाराज सूरजमल की प्रतिमा का अनावरण किया। संसद में यूपी समेत 5 राज्यों से हजारों लोग पहुंचे। ट्रैक्टरों पर लोग ढोल-नगाड़े बजाते हुए चलते रहे। पीछे गाड़ियों की लंबी कतार लगी रही। 2000 से अधिक ट्रैक्टरों से लोग पहुंचे। पंडाल में लगाई गईं 10 हजार कुर्सियां फुल हो गईं। काफी संख्या में लोग बाहर खड़े रहे। अंतरराष्ट्रीय जाट संसद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनु चौधरी का कहना है कि जाट शब्द को लेकर जो यहां धरना चल रहा था। अब वह खत्म हो गया है। क्योंकि प्रशासन ने कागजी कार्रवाई के लिए ने 10 दिन का समय मांगा है। लेकिन हमने उन्हें 15 दिन का समय दिया है। अगर 15 दिन बाद प्रशासन ने मृर्ति के पास जाट शब्द नहीं लिखवाया तो हम 16वें दिन इसी स्थान पर एक पंचायत करेंगे। उस पंचायत में आगे की रणनीति तय करेंगे। अंतरराष्ट्रीय जाट संसद के संस्थापक रामअवतार पलसानिया ने कहा कि प्रशासन द्वारा लगातार इस कार्यक्रम को विफल बनाने के लिए प्रयास किया गया। उसमें चाहे परमिशन की बात हो या इस जाट शब्द को लेकर विवाद। सुरक्षा व्यवस्था सही न होने के कारण हमारे मुख्य अतिथि मूर्ति का अनावरण भी नहीं कर पाए। इसके बाद इस शब्द को लेकर विवाद भी प्रशासन द्वारा ही कराया गया। हमने प्रशासन को 15 दिन का समय दिया है। अगर हमारी मांग पूरी नहीं होती तो 16वें दिन समस्त जाट बिरादरी का जो निर्णय होगा। उसी के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन को पता नहीं जाट राजा सूरजमल जी और जाट बिरादरी से क्या परेशानी है? ये यूपी की सबसे बड़ी प्रतिमा थी। दुनियाभर से जाट बिरादरी के लोग यहां पहुंचे थे। हमारा जाट शब्द जो गुम हो गया है। प्रशासन उसे संजीव बालियान को वापस करेगा। मामले पर नागौर सांसद हनुमान बेनिवाल ने सीएम योगी पर निशाना साधा। उन्होंने मंच से कहा- पुलिस ने जाट शब्द हटा दिया। वो तो बालियान जी अपने आप बात करेंगे, नहीं तो आपके योगी जी को ही हटवा देंगे।

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