भारत-दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के बीच ‘नॉलेज पार्टनर’ की भूमिका निभाएगा सीएसईएएस

भारत-दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के बीच ‘नॉलेज पार्टनर’ की भूमिका निभाएगा सीएसईएएस

रिपोर्ट. शाश्वत तिवारी
रियल मीडिया न्यूज नेटवर्क/राजगीर। नालंदा विश्वविद्यालय में ‘सेंटर फॉर साउथईस्ट एशियन स्टडीज’ (सीएसईएएस) की स्थापना की गई। विदेश मंत्रालय में सचिव (पूर्व) पी. कुमारन ने इस केंद्र का उद्घाटन किया। यह सेंटर भारत और दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के बीच अकादमिक अनुसंधान, नीतिगत जुड़ाव और सांस्कृतिक-सभ्यतागत संबंधों को गहरा करने के लिए एक ज्ञान भागीदार (नॉलेज पार्टनर) के रूप में कार्य करेगा। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा जलवायु और समुद्री अध्ययन से लेकर व्यापार, विरासत, सार्वजनिक स्वास्थ्य, प्रवासन, डिजिटल सहयोग और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों तक, दस अंतर्विषयक अनुसंधान समूहों पर आधारित यह केंद्र, 2026-2030 के लिए ‘आसियान-भारत व्यापक रणनीतिक साझेदारी कार्य योजना’ के लिए एक ज्ञान भागीदार के रूप में कार्य करने का लक्ष्य रखता है। यह केंद्र अकादमिक अनुसंधान को सुदृढ़ करके, नीतिगत जुड़ाव को समर्थन देकर और सांस्कृतिक तथा सभ्यतागत संबंधों को गहरा करके भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच एक सेतु का कार्य करेगा। इस दौरान सेंटर के उद्घाटन के अलावा नालंदा विश्वविद्यालय का दूसरा दीक्षांत समारोह धूमधाम से आयोजित हुआ, जिसमें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने अपनी मौजदूगी दर्ज कराई। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने विश्वविद्यालय परिसर में बोधि वृक्ष का एक पौधा लगाया, जो बौद्ध विरासत और भारतीय आध्यात्मिकता का एक शाश्वत प्रतीक है। राष्ट्रपति मुर्मु ने नालंदा विश्वविद्यालय परिसर में 2000 सीटों वाले सभागार, ‘विश्वामित्रालय’ का उद्घाटन भी किया। विदेश मंत्री ने मंगलवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा 600 से अधिक ग्रेजुएट्स। 31 देश। एक साझा सफ़र, नालंदा भारत की बौद्धिक विरासत और सांस्कृतिक भव्यता की यादें ताजा करता है और दुनिया को यह याद दिलाता है कि तकनीक और परंपरा, विकास भी, विरासत भी, को हमेशा साथ-साथ चलना चाहिए। बता दें कि बिहार में नालंदा के प्राचीन खंडहरों के समीप, राजगीर में स्थित आधुनिक नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना संसद के एक अधिनियम द्वारा की गई थी। इसके बाद विश्वविद्यालय में सीएसईएएस केंद्र की स्थापना की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अक्टूबर 2025 में कुआलालंपुर में आयोजित 22वें आसियान-भारत शिखर सम्मेलन के दौरान की थी। यह स्थापना भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ को मजबूत करने और प्राचीन नालंदा की बौद्धिक विरासत को पुनर्जीवित करने के प्रयासों का हिस्सा है। उम्मीद जताई जा रही है कि यह सेंटर आसियान-भारत व्यापक रणनीतिक साझेदारी योजना को समर्थन देने के लिए एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय मंच बनकर उभरेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *