नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति में भाजपा के खिलाफ संयुक्त विपक्षी मोर्चा बनाने की ममता बनर्जी की अपील को कांग्रेस और वाम दलों ने सिरे से खारिज कर दिया है। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने एक वीडियो संदेश जारी कर कांग्रेस, सीपीएम और अन्य वामपंथी दलों से भाजपा के खिलाफ एकजुट होने की अपील की थी। उन्होंने भाजपा को सबसे बड़ा दुश्मन बताते हुए सभी विपक्षी ताकतों से साथ आने का आह्वान किया था। हालांकि, ममता की इस पहल को विपक्षी दलों ने तुरंत नकार दिया। कांग्रेस प्रवक्ता सौम्य ऐच रॉय ने तृणमूल कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि ममता बनर्जी अब उन अल्ट्रा-लेफ्ट समूहों का समर्थन मांग रही हैं, जिन पर 2013 में कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर हमलों के आरोप लगे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस ने पिछले चुनावों में कांग्रेस को लगातार बदनाम किया और राज्य में भाजपा को मजबूत होने का मौका दिया। रॉय ने कहा कि बंगाल में भाजपा को राजनीतिक जमीन देने का काम खुद ममता बनर्जी ने किया था। वहीं, मोहम्मद सलीम के नेतृत्व वाली सीपीएम ने भी ममता बनर्जी की अपील को पूरी तरह खारिज कर दिया। सीपीएम राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने तृणमूल कांग्रेस को भ्रष्ट और सांप्रदायिक करार देते हुए कहा कि भाजपा के खिलाफ लड़ाई का मतलब तृणमूल कांग्रेस के साथ खड़ा होना नहीं हो सकता। सीपीआई के राज्य सचिव स्वपन बंदोपाध्याय ने भी साफ शब्दों में कहा कि ममता बनर्जी जैसी तानाशाही और अलोकतांत्रिक नेता के साथ हाथ मिलाने का कोई सवाल ही नहीं उठता। उधर, सीपीआई (एम-एल) लिबरेशन के अभिजीत मजूमदार ने तृणमूल कांग्रेस को दक्षिणपंथी और अधिनायकवादी पार्टी बताया। वहीं एसयूसीआई (कम्युनिस्ट) के पोलित ब्यूरो सदस्य अमिताभ चटर्जी ने कहा कि ममता बनर्जी अब ऐसी अपील इसलिए कर रही हैं क्योंकि उन्हें राजनीतिक हार का सामना करना पड़ा है। इस बीच, पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने भी ममता बनर्जी की अपील को महत्वहीन बताया। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी अब राज्य की राजनीति में कोई खास राजनीतिक महत्व नहीं रखतीं।
करारी हार के बाद अकेली पड़ीं ममता: कांग्रेस और लेफ्ट ने साथ आने से किया इनकार, टीएमसी को भ्रष्ट पार्टी बताया
