लखनऊ। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी ने बकरीद पर कुर्बानी और नमाज को लेकर एक बयान जारी किया है। उन्होंने मुसलमानों से खुली जगहों पर कुर्बानी न करने और सड़कों पर नमाज न पढ़ने की अपील की है। यह बयान बंगाल और दिल्ली में कुर्बानी विवादों तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नमाज संबंधी बयान के बाद आया है। शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी ने स्पष्ट किया कि कुर्बानी इस्लाम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो हजरत इब्राहिम के बलिदान की याद दिलाता है। मौलाना रजवी ने कहा कि नमाज सड़कों और चौराहों पर नहीं पढ़नी चाहिए, क्योंकि वहां शांति और एकाग्रता नहीं मिल पाती। उन्होंने मुसलमानों से मस्जिदों और घरों में नमाज अदा करने का आग्रह किया। यह भी बताया कि पूरे भारत में कुर्बानी पर कोई प्रतिबंध नहीं है। हालांकि, उन्होंने खुली जगहों के बजाय स्लॉटर हाउस या अपने घरों में कुर्बानी करने की सलाह दी। कुर्बानी के बाद खून और अवशेषों को गड्ढे में दफनाने का निर्देश दिया गया। उन्होंने सोशल मीडिया पर कुर्बानी के फ़ोटो या वीडियो पोस्ट न करने की भी हिदायत दी। युवाओं को भी इस बारे में जागरूक करने को कहा गया। विवाद की स्थिति में शांतिपूर्वक समाधान और अधिकारियों से संपर्क करने की सलाह दी गई।
कुर्बानी के नियम और सामाजिक सद्भाव
शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी ने जोर दिया कि कुर्बानी करते समय दूसरे धर्मों के लोगों की भावनाओं का सम्मान किया जाए। उन्होंने कहा कि कुर्बानी का दिन इस्लाम के अनुयायियों को किसी को तकलीफ न देने का सबक सिखाता है। प्रतिबंधित जानवरों की कुर्बानी न करने का भी निर्देश दिया गया। कुर्बानी के दौरान उत्पन्न होने वाले किसी भी विवाद को शांतिपूर्ण ढंग से निपटाने की बात कही गई। उन्होंने उच्च अधिकारियों को जानकारी देने की भी सलाह दी।
नमाज और भीड़ प्रबंधन
मौलाना ने कहा कि सड़कों पर शोर-शराबे और यातायात के कारण यह संभव नहीं है। आबादी बढ़ने और मस्जिदों में जगह की कमी होने पर उन्होंने एक ही मस्जिद या ईदगाह में एक से अधिक जमातें करने का सुझाव दिया। कहा कि शरीयत के अनुसार, एक इमाम के बाद दूसरा इमाम दूसरी जमात करा सकता है। इस व्यवस्था से भीड़ की समस्या हल हो सकती है और सभी लोग शांति से नमाज अदा कर सकते हैं।
‘खुली जगह पर न करें कुर्बानी, सड़कों पर न पढ़ें नमाज’: मौलाना शहाबुद्दीन रजवी
