ज़रा सी बारिश ने उठा दी विकास कार्यों के चेहरे से नकाब

ज़रा सी बारिश ने उठा दी विकास कार्यों के चेहरे से नकाब

कानपुर दक्षिण में खुदाई और अधूरे पड़े कार्यों की वजह से हालात गंभीरः मनोज कुमार शुक्ल बबलू
कानपुर। ज़रासी बरसात हुई रोता है क्या। आगे-आगे देखिए होता है क्या? अभी तो बारिश की शुरूआत हुई है और कानपुर दक्षिण इलाके के बाशिंदे रोने लगे हैं। कथित विकास कार्यों के नाम पर कोई भी मोहल्ला ऐसा नहीं है जहां खुदाई से नरक न बन गया हो जल भराव और फिर उसमें उतराती गंदगी कीचड़, कचरा के बीच जो हालत हो गई है उसे बदतर माना जा रहा है लेकिन नागरिकों के अंदर फैल गई दहशत बता रही है कि इस पूरी बारिश में समूचे क्षेत्र की जो दुर्गति होने वाली है वह अकलपनीय और एक बड़ी त्रासदी बनने जा रही है। कानपुर दक्षिण क्षेत्र में जल निकासी का कोई भी ठोस प्रबंध कभी नहीं किया गया। ऊपर से नाले, नालियां, बनी बनाई सड़के कहीं पाइप डालने के नाम पर कहीं सड़क बनाने के लिए कहीं खड़ंजा बिछाने के लिए खोद कर छोड़ दिये गये हैं। बड़े-बड़े गढ्डे, मेनहोल सब खुले पड़े हैं कौन कहां कब इनमें समाकर जान माल से हाथ धो बैठेगा कुछ कहा जा नहीं सकता। ऐसी कोई जगह नहीं है जहां खुदा हुआ न हो तो फिर बाशिंदो को तो खुदा का ही सहारा है। नाला सफाई के नाम पर कचरा सड़क पर डाला गया उसे फिर उठाया नहीं गया या तो वह सूख कर धूल बनकर नागरिकों के फेफड़ों में समा गया अथवा बारिश में बहकर फिर उसी नाले नाली में जा गिरा। दस लाख से ऊपर की आबादी पर जल भराव गंधाते कूड़े कचरे से होने वाली बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है। जिम्मेदार जनप्रतिनिधि कहते है कि विकास कार्य हो रहा है अकसर कहते है कि चिंता न कीजिए पार्टियों के नेता कहते है कि सत्ता पक्ष की जय-जय के नारे लगाइए बाकी सब ठीक है। कल हुई बारिश ने सारे दावों और विकास के विकृत चेहरे से नकाब उठा दी है। स्पष्ट दिख रहा है कि बरसात के यह तीन महीने यहां की जनता पर बहुत भारी पड़ने वाले हैं। लोग एक-एक कदम चलने को तरस जायेंगे।
कानपुर में शुक्रवार को हुई झमाझम बारिश ने नगर निगम के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं। शहर के एक छोर से दूसरे छोर तक जलभराव और जर्जर सड़कों के कारण लोग परेशान हैं। सबसे ज्यादा चकेरी क्षेत्र में बारिश ने गंभीर स्थिति पैदा कर दी है। कांशीराम अस्पताल और सीएमओ कार्यालय परिसर तक जलमग्न हो गए हैं, जिससे मरीजों और कर्मचारियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, लाल बंगला स्थित पुलिस चौकी के पास एक विशाल पेड़ गिर गया, जिससे दोनों तरफ की सड़कें बंद हो गईं और घंटों तक यातायात बाधित रहा।
मानसूनी बारिश इस बार अगस्त या सितंबर के महीने में अधिक हो सकती है। मानसून इस बार भी देर से आ रहा है। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रोद्योगिकी विवि के मौसम विभाग में उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक जब भी मानसून देर से आया है, तो बारिश पैटर्न बदला है। मानसूनी बारिश अगस्त, सितंबर में अधिक हुई। इसके अलावा अक्तूबर में लौटते वक्त भी मानसूनी बारिश हुई है। विश्वविद्यालय के मौसम विभाग के नोडल एवं तकनीकी अधिकारी अजय मिश्रा ने बताया कि इस बार अगस्त-सितंबर में अधिक बारिश होने का अनुमान है। देर से आने पर कम मानसूनी बारिश देखने को मिली है। बारिश देर से हुई है। प्रशांत महासागर में अल-नीनो प्रभाव के कारण इस बार सामान्य से कम वर्षा होने का अनुमान है। आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 1972 में मानसून चार जुलाई को आया, उस साल अगस्त में सर्वाधिक 266.7 मिमी बारिश हुई और सितंबर में जारी रही। इसी तरह वर्ष 1973 में अगस्त में 392.3 मिमी बारिश हुई थी। इसी तरह हाल के वर्षों में 2022 में मानसून 20 जुलाई को आया था। उस साल अगस्त में 273.3 और सितंबर में 257.4 मिमी बारिश हुई। उन्होंने बताया कि जब भी मानसून जुलाई में आया। मानसूनी बारिश का पैटर्न यही रहा है।
इस संबंध में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता मनोज कुमार शुक्ल बबलू ने बताया कि सबसे ज्यादा खराब हालत महाराजपुर विधानसभा क्षेत्र की है कोई मोहल्ला ऐसा नहीं है जहां जल भराव बज बजाती नालियां, भरे पड़े नाले, खुदी हुई सड़कों पर कीचड़ का नज़ारा न दिख रहा हो अभी से लोगों का घरों से निकलकर कहीं पहुंच पाना मुश्किल हो रहा है। आगे पूरी बरसार पड़ी हुई है इस साल लोगों को कितनी भयानक तकलीफ होने जा रही है इसका अंदाज़ा अभी से लगना शुरू हो गया है। बताया कि चुनावी वर्ष आ रहा है सरकार की चाल बाजी ये है कि तमाम नये कार्यों की शुरूआत करके लोगों को बरगलाने का प्रयास किया जा रहा है। अब कोई भी काम बरसात में तो न आगे बढ़ सकता है, न पूरा हो सकता है बल्कि जीवन को कठिनाई में डाल दिया गया है। उन्होंने मांग की है कि महारजपुर विधानसभा क्षेत्र में परेशानी बढ़ाने वाले फर्जी कार्यों को अगर ठीक से नहीं किया जाता तो नागरिक शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए बाध्य हो जायेगें। कहा कि स्कूल खुल गये हैं बच्चे जा नहीं पा रहे हैं मां-बाप किसी अनहोनी के डर से भयभीत है। इस लिए इस क्ष़्ोत्र में सारी व्यवस्थाएं तुरन्त दुरूस्त की जाए।

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