जगदीश श्रीवास्तव
रियल मीडिया नेटवर्क
राठ हमीरपुर। मादक पदार्थों की बिक्री इस समय नगर में अपने चरम पर है। वैध-अवैध और देशी मदिरा के साथ-साथ भांग, गांजा, अफीम और स्मैक तक यहां खुलेआम बेचे जा रहे हैं। इसमें अधिकतर चाय,पान और गुटखा बेचने वाली दुकानें संलिप्त हैं।आज का किशोर और युवा वर्ग इसके आगोश में तेजी से आता जा रहा है। जिससे कि उनका भविष्य भी अंधकारमय हो रहा है। शिकायत करने के बावजूद संबंधित अधिकारीगण सेटिंग- लेटरिंग के चलते इस ओर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे रहे हैं।
बताते चलें कि काफी दिनों से नगर में मदिरा के साथ-साथ गांजा की आपूर्ति भी भारी मात्रा में हो रही है। सूत्र बताते हैं कि झारखंड से महिलाओं,पुरुषों द्वारा यह गंजा ट्रेन और गाड़ियों को बदल- बदल कर यहां लाया जा रहा है। आज का किशोर व युवा वर्ग मदिरा के साथ-साथ गांजे का भी अभ्यस्त हो चुका है। भांगेड़ियों की संख्या तो काफी कम है, लेकिन इसके स्थान पर अब एक नया स्मैक का नशा नव धनाढ्यों के ऊपर छा गया है। स्मैक युक्त एक-एक सिगरेट सवा सौ-डेढ़ सौ रुपए की बेची जा रही है।
कोटबाजार स्थित जलविहार मंदिर के नीचे महुआ के ढेर लगे रहते हैं। वहां से गांव वाले काफी मात्रा में महुआ खरीद कर ले जाते हैं और उसी महुआ से देशी शराब भी बनाने का कार्य करते हैं।
नगर का एक परिवार जो कि काफी पहले से गांजा बिक्री में लिप्त था, उसके मुखिया ने तो झारखंड में ही अपने परिवार को स्थानांतरित कर दिया है और वहां से उस परिवार की महिलाएं, अन्य गरीब महिलाओं के द्वारा गठरियों में ट्रेन से ले जाकर गंतव्य स्थल तक गांजे की खेप पहुंचातीं हैं।
इस समय हर जगह सुलभ गांजे की एक छोटी पुड़िया की कीमत ₹50 है,जिसको जगह-जगह लड़के पीते हुए दिखाई दे जाते हैं।
यदि नशीले पदार्थों का उपयोग ऐसे ही जारी रहा, तो वैसे भी इस पिछड़े क्षेत्र की कुछ संभावित प्रतिभाएं अपना भविष्य बर्बाद कर लेंगी।
