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बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे किनारे औद्योगिक गलियारे के लिए अधिग्रहण की सूचना से महोबा में आक्रोश, DM ने एसडीएम से जांच के आदेश दिए
महोबा । कृष्ण कुमार द्विवेदी
बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के किनारे प्रस्तावित औद्योगिक गलियारे की खबर ने महोबा जिले के किसानों की चिंता बढ़ा दी है। कबरई विकासखंड के चिचारा, मवई खुर्द, तमौरा, बरबई और छानी कला गांव में भूमि अधिग्रहण की सूचना मिलते ही सोमवार को सैकड़ों किसानों ने तमौरा गांव के प्रधान नरेंद्र पांडे के नेतृत्व में कलेक्ट्रेट पहुंच जिलाधिकारी को ज्ञापन दिया।
हाथों में तख्तियां और ज्ञापन लेकर पहुंचे ग्रामीणों ने जिलाधिकारी गजल भारद्वाज को ज्ञापन सौंपकर अपनी कृषि भूमि को अधिग्रहण से मुक्त रखने की मांग की।
यह जमीन हमारी मां है”*
प्रदर्शनकारी किसानों का कहना है कि इन पांचों गांवों की जमीन बुंदेलखंड में सबसे उपजाऊ मानी जाती है। यहां गेहूं, चना और दलहन की अच्छी पैदावार होती है और अधिकांश परिवारों की आजीविका पूरी तरह इसी खेती पर निर्भर है।
तमौरा प्रधान ने ज्ञापन सौंपते हुए कहा, “हम औद्योगिक विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन विकास के नाम पर किसानों की रोजी-रोटी मत छीनिए। हमारी 3-4 पीढ़ियों से यही खेती है। 2 बीघा जमीन में ही पूरे घर का खर्च चलता है। अगर जमीन चली गई तो हम मजदूरी करने कहां जाएंगे? बच्चों को कैसे पढ़ाएंगे?”
चिचारा के एक किसान ने कहा कि जमीन चली गई तो उनके सामने गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। मवई खुर्द और बरबई के ग्रामीणों ने भी यही मांग दोहराई।
DM ने दिए जांच के आदेश
ज्ञापन मिलने के बाद जिलाधिकारी गजल भारद्वाज ने मामले को गंभीरता से लिया। उन्होंने संबंधित क्षेत्र के एसडीएम को जांच अधिकारी नियुक्त कर मौके पर जाकर किसानों से वार्ता कर समाधान निकालने के निर्देश दिए हैं।
DM ने किसानों को आश्वासन दिया कि “बिना बातचीत और उचित मुआवजे की प्रक्रिया के कोई अधिग्रहण नहीं होगा। किसानों के हितों का पूरा ध्यान रखा जाएगा।”
विकास बनाम विस्थापन
बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के किनारे औद्योगिक गलियारा बनने से क्षेत्र में रोजगार और निवेश की उम्मीदें हैं। लेकिन इस अधिग्रहण की सूचना ने विकास और विस्थापन की पुरानी बहस को फिर से जिंदा कर दिया है।
अब सबकी निगाहें एसडीएम की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांग नहीं मानी गई तो वे बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

