भरुआ सुमेरपुर। देश की आजादी के लिए संघर्षी सहभागिता के मद्देनजर वर्णिता संस्था के तत्वावधान मे विमर्श विविधा के अन्तर्गत जिनका देश ऋणी है के तहत कस्बे में काकोरी केस के एक महान पुरोधा जोगेशचन्द्र चटर्जी की पुण्यतिथि पर संस्था के अध्यक्ष डा. भवानीदीन ने श्रद्धान्जलि देते हुये कहा कि जोगेशचन्द्र चटर्जी एक महान क्रांतिकारी थे। इनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है। इनके विषय मे अधिक उल्लेख अनुपलब्ध है और जन्म तथा पुण्यतिथि में मत भिन्नता दिखाई पडती है।जबकि एक देशभक्त के बारे मे यह उचित नहीं है। इनका जन्म 1895 मे ढाका जिले (बंगाल) के गावदिया गांव मे हुआ था। 9 अगस्त 1925 के काकोरी केस मे चटर्जी की भूमिका महत्वपूर्ण थी। इस ट्रेन डकैती मे चटर्जी को आजीवन कारावास की सजा मिली थी। आजादी के पहले अन्य स्वाधीनता आंदोलनों मे भी चटर्जी को सजायें मिली। 1937 में कांग्रेसी सत्ता आने पर ये जेल से मुक्त हुये। जेल मे इनके साथ अमानवीय अत्याचार हुआ। जिसे पढ़कर रोगटें खडे हो जाते है फिर भी पुलिस इनसे राज नहीं उगला सकी, क्योंकि कठोर दिल के चटर्जी के लिये देश पहले था। जेल यातनाओं को लेकर इनकी 142 दिनों की लम्बी भूख हड़ताल भी हुई। ये फतेहगढ़, आगरा और लखनऊ की जेल मे रहे। आजादी के पहले तक ये आन्दोलनकारी रहे। अन्ततः 19 अप्रैल 1946 को जेल से छूटे। आजादी के बाद ये कांग्रेंस से जुडकर राज्यसभा सासंद भी रहे। कालांतर मे इनका 22 अप्रैल 1969 मे निधन हो गया। इस कार्यक्रम मे अशोक अवस्थी, सिद्धा, रिचा, महावीर प्रजापति, रितिक सोनी, रामनरायन सोनकर, संतोष, महावीर, विकास, आशुतोष, प्रेम प्रजापति, अजय, दस्सी आदि शामिल रहे।
काकोरी केस के एक पुरोधा जोगेशचन्द्र चटर्जी की पुण्यतिथि पर दी श्रृद्धांजलि
