जगदीश श्रीवास्तव
राठ हमीरपुर। सोने के आभूषण बनाने वाले बंगाली कारीगर राठ के सर्राफा व्यवसायियों का करोड़ों का सोना लेकर चंपत हो गए। सर्राफा व्यवसाई हैं कि अभी भी स्थानीय पुलिस के कहने के बावजूद अपनी-अपनी शिकायतें, टैक्स के डर से कोतवाली में नहीं दे रहे हैं। लगभग 6 किलो सोना लेकर भागे बंगाली कारीगरों का अभी तक कोई अता पता नहीं है और इसी के चलते इनकी गारंटी लेने वाले सर्राफा व्यवसायी की भी संदिग्ध हालत में मृत्यु हो चुकी है।
सर्राफा व्यवसायियों ने बताया कि काफी वर्षों से बंगाल के कारीगरों को यहां सोने के आभूषण बनवाने के लिए बुलाया जाता था और उनकी पूरी निगरानी भी रखी जाती थी। जिससे कि उनको दिया गया सोना सुरक्षित रहे और वे भाग न सकें। कुछ दिनों पूर्व राठ के सर्वाधिक प्रतिष्ठित व्यापारी प्रतिष्ठान “जय महाकाली” में बंगाल से अल्ताफ नामक व्यक्ति सोने के आभूषण बनाने के लिए आया था।परंतु कुछ माह बाद वह प्रतिष्ठान के मालिक का लगभग 90 ग्राम सोना लेकर चंपत हो गया। बाद में फोन करके उसने बताया कि मैं धीरे-धीरे सोना वापस कर दूंगा और कर भी दिया। उसके बाद इस प्रतिष्ठान के स्वामी ने उसको अपने यहां से निकाल दिया। दूसरे साधारण सर्राफा व्यवसायी ध्रुवराम सोनी ने अपनी गारंटी पर उसको सोने के आभूषण बनाने के लिए सर्राफा व्यवसायियों से आभूषण बनाने के लिए सोना दिलवाया। काफी दिनों तक यह सब सामान्य रूप से ही चलता रहा।इस बीच बंगाल के 12-13 कारीगर और इधर-उधर व्यवसाईयों के यहां स्वर्ण आभूषण बनाने लगे।
अल्ताफ के साथ उसके दो अन्य साथी शहाबुद्दीन और मानव भी अलग से जेवरात बनाने का काम करते थे। चंद दिनों पूर्व यह सभी एक बारगी भाग गए।उन लोगों के भागने से पूरे सर्राफा बाजार में हड़कंप मच गया। शादियों के इस मौसम में जो लोग आभूषण बनवाने का काम सर्राफा व्यवसायियों को दिए थे। अब वे उनको समय से आभूषण बनवाकर कहां से देंगे।पूरी घटना से सर्राफा व्यवसायी तो घबराए हुए ही हैं।इसका कारण है कि उनका लाभ तो गया ही गया, ग्राहकों को कैसे संतुष्ट करेंगे।
यहां उल्लेखनीय है कि लगभग एक वर्ष पूर्व कानपुर महानगर में भी बंगाली कारीगर सोना लेकर भाग गए थे, परंतु मजबूत इच्छा शक्ति के कानपुर के सर्राफा व्यवसाईयों ने अपना काफी धन आने जाने में खर्च किया और पुलिस के साथ उन भागे हुए बंगाली कारीगरों को बंगाल से खोज निकाला तथा काफी कुछ सोना भी बरामद करवा लिया। परंतु राठ नगर के बहुतेरे सर्राफा व्यवसायी काफी पहले से ही कुख्यात रहे हैं। टैक्स चोरी करना इनका मुख्य सग़ल है।ग्राहकों के साथ भी यही सब होता है। अब इनकी हिम्मत नहीं पड़ रही है कि लिखित में अपनी समस्या को पुलिस को सौंपे और जब तक पुलिस को यह व्यवसायी लिखित नहीं देंगे,तब तक पुलिस भी कर भी क्या सकती है?
