राहुल कुमार
उरई जालौन। उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक फेरबदल के तहत जालौन के पुलिस अधीक्षक विनय कुमार सिंह का स्थानांतरण कर उन्हें गाजीपुर के पुलिस अधीक्षक के रूप में तैनात किया गया है। वहीं, सुरेश चंद्र रावत को जिले का नया पुलिस अधीक्षक बनाया गया है। शासन द्वारा 06 अक्टूबर 2026 को जारी 20 आईपीएस अधिकारियों की तबादला सूची में यह बदलाव किया गया है। इस बदलाव को पुलिस महकमे में अहम माना जा रहा है। विनय कुमार सिंह ने 1 अप्रैल 2026 को जालौन के पुलिस अधीक्षक के रूप में कार्यभार संभाला था। अपने लगभग 6 महीने के कार्यकाल के दौरान उन्होंने अपराध और अपराधियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए कई विशेष अभियान चलाए। उनके नेतृत्व में पुलिस ने कई संगीन मामलों का सफलतापूर्वक खुलासा किया, जिससे जिले में अपराध पर अंकुश लगाने में मदद मिली। उनकी कार्यशैली सख्त और सक्रिय पुलिसिंग के लिए जानी जाती रही है। यूपी पुलिस के सुरेश चंद्र रावत मूल रूप से सीतापुर के रहने वाले हैं और लंबे समय तक प्रांतीय पुलिस सेवा पीपीएस में कार्य करने के बाद 2026 में भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) में पदोन्नत हुए। सुरेश चंद्र रावत काजन्म 25 जुलाई 1972जनपद सीतापुर,उत्तर प्रदेशशिक्षा एमए अर्थशास्त्रपुलिस सेवा में भर्ती 1जून 1999 मूल सेवा यूपी प्रांतीय पुलिस सेवा आईपीएस पदोन्नति 2026 और 7 अक्टूबर 2026 को मथुरा से जालौन तैनात जून 2026 में विभागीय पदोन्नति समिति ने 1997, 1998, 1999 और 2000 बैच के 30 यूपी पीपीएस अधिकारियों को आईपीएस में पदोन्नति के लिए मंजूरी दी थी, जिसमें रावत का नाम भी शामिल था। जुलाई 2026 में मथुरा पुलिस लाइन में उनकी पीपिंग सेरेमनी हुई, जहां तत्कालीन एसएसपी श्लोक कुमार ने उनके कंधों पर आईपीएस बैज लगाया।आईपीएस पदोन्नति से पहले वे एसपी ग्रामीण,मथुरा के रूप में कार्य कर रहे थे फरवरी 2026 में साइबर ठगी के खिलाफ मथुरा के शेरगढ़ क्षेत्र के दो गांवों में उनकी निगरानी में बड़ी कार्रवाई हुई, जिसमें 240 पुलिसकर्मियों, 13 थाना प्रभारियों की टीम ने 34 लोगों को हिरासत में लिया। 2020 में वे एडीशनल डीसीपी/एएसपी स्तर पर लखनऊ में तैनात थे। जनवरी 2020 में कृष्णानगर में अधिवक्ता शिशिर त्रिपाठी की हत्या के मामले में उन्होंने जांच की जानकारी मीडिया को दी थी। साथ ही यूपी पुलिस की 2023 टेलीफोन निर्देशिका में उनका नाम महिला पावर लाइन-1090 से जुड़े तकनीकी अधिकारी सीसीटीएनएस के रूप में भी दर्ज है।सरकारी रिकॉर्ड में उनका कैडर आईपीएस-एसपीएस दर्ज है, अर्थात वे सीधे यूपीएससी की नियमित भर्ती से नहीं, बल्कि पीपीएस से पदोन्नति के जरिए आईपीएस में आए हैं। अब जालौन के नए पुलिस अधीक्षक के रूप में उनके सामने अपराध नियंत्रण, कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ रखना और पुलिस-जनता के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना बड़ी चुनौती होगी।
