भारत में लोकतंत्र बचाने के ढोंग में अराजकता फैलाने की आहट!

भारत में लोकतंत्र बचाने के ढोंग में अराजकता फैलाने की आहट!

विद्यासागर त्रिपाठी
कानपुर देहात। नेता विपक्ष राहुल गांधी के साथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे सहित इंडी गठबंधन के कई अन्य नेता गण कहते हैं कि – वर्तमान एनडीए की मोदी सरकार वोट चोरी करके बनी है,इसलिए वो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी को भारत का प्रधानमंत्री नहीं मानते। और वो मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार जी का इस्तीफा लेकर ही रहेंगे और उनका इस्तीफा कराने के लिए दिल्ली में लगातार कुछ न कुछ वो ऐसा करते रहते हैं जिसको देखकर लगता है कि नेता विपक्ष के पास सार्थक मुद्दों का अभाव हो गया है। इसीलिए वो भारत की राजधानी में लगातार किसी न किसी झूठ के सहारे प्रतिदिन अराजकता फैलाने का काम कर रहे हैं । कभी प्रधानमंत्री जी का घर घेरने का आवाहन करते हैं, कभी आकाशवाणी भवन में ही कब्जा करके धरना प्रदर्शन करने लगते हैं,कभी जंतर- मंतर प्रस्थान करते हुए देश की राजधानी दिल्ली का आवागमन ठप्प करते हैं!भविष्य के लिए उनकी लम्बी कार्ययोजना सामने आ चुकी है,जिसका उद्देश्य सिर्फ और सिर्फ देश को अराजकता में झोंकने का है। आइये यहां विचार करते हैं कि ज्ञानेश कुमार जी का दोष क्या है? मोदी जी एक के बाद एक लगातार तीसरी बार लोकतांत्रिक रूप से चुनाव जीतकर भारत के प्रधानमंत्री चुने गए हैं, इसी के साथ में चुनावी तारीखों से सच्चाई का आकलन करते हैं, पहली बार 26 मई 2014 में, दूसरी बार 19 मई 2019 को और तीसरी बार पुनः 9 जून 2024 को निर्वाचित होकर भारत के प्रधानमंत्री बनें। अब यहां गौर करने वाली बात यह है कि वर्तमान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार जी 17 फरवरी 2025 की अधिसूचना के तहत 19 फरवरी 2025 को भारत के 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में उन्होंने पदभार संभाला है । अर्थात 2014, 2019 और 2024 में जब लोकसभा के चुनाव हुए और नरेन्द्र मोदी जी भारत के प्रधानमंत्री बने उस समय ज्ञानेश कुमार जी भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त थे ही नहीं। नेता विपक्ष राहुल गांधी एवं कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन और इंडी गठबंधन के नेताओं द्वारा ज्ञानेश कुमार जी पर लगाये जा रहे आरोप आश्चर्य जनक हैं। विपक्षी नेताओं के आरोप हैं कि ज्ञानेश कुमार जी द्वारा कराई गई वोट चोरी से नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री हैं। ऐसे में 2014 में, 2019 में, और 2024 के चुनावों से ज्ञानेश कुमार जी का कोई संबंध क्यों और कैसे बनता है ? नेता विपक्ष राहुल गांधी कहते हैं कि देश में अवैधानिक चुनाव हो रहे हैं और मोदी जी अवैध रूप से प्रधानमंत्री हैं। अमित शाह जी भी अवैध रूप से गृह मंत्री हैं। इसलिए सरकार भंग की जाये और बैलेट पेपर से चुनाव कराए जायें,तथा देश भर में चल रही SIR प्रक्रिया को समाप्त कर दिया जाये। जबकि उपरोक्त सभी बिंदुओं पर भारत का सर्वोच्च न्यायालय स्वयं निगरानी कर रहा है। यहां पर एक प्रश्न पूछना आवश्यक लगता है कि क्या नेता विपक्ष राहुल गांधी एवं कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी अवैध सांसद हैं ? तो फिर राहुल गांधी प्रतिदिन क्यों चिल्लाते घूमते हैं कि मैं नेता विपक्ष हूं? सबसे पहले वो ही नैतिकता के आधार पर अपना स्वयं का इस्तीफा क्यों नहीं दे देते ? क्या तमिलनाडु,कर्नाटक,केरल,पंजाब,जम्मू &कश्मीर हिमाचल प्रदेश के साथ झारखंड की सरकारें अवैध हैं वहां के मुख्यमंत्री अवैध हैं ? तो ऐसी स्थिति है में उपरोक्त प्रदेशों की सरकारें नैतिकता के आधार पर इस्तीफा क्यों नहीं दे रहीं ? उपरोक्त प्रदेशों के कांग्रेस और विपक्ष के सांसद विधायक अपना इस्तीफा देकर अपना नैतिक आदर्श क्यों स्थापित नहीं कर रहे ? यदि विपक्ष ऐसा नहीं कर सकता तो जनता में झूठ फरेब भ्रम फैलाकर भारत के संविधान और लोकतंत्र का अपमान मत करिए,इसे बंद करिए, इससे कुछ भी हासिल होने वाला नहीं है, लेकिन विपक्षियों का मकसद भारत में भी वेनेजुएला, श्रीलंका,बांगलादेश नेपाल जैसी ही अराजकता फैलाने का मकसद है,तो वो अलग बात है। जो इस बात का स्पष्ट संकेत देता है कि अब कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व को सत्ता की भूख इस कदर तीब्र हो गई है कि वह सत्ता की भूख मिटाने के लिए भारत के लोकतंत्र को छिन्न भिन्न भी कर सकती है जैसा कि पूर्व काल 1975 में भी कांग्रेस पार्टी भारत के लोकतंत्र की धज्जियां उड़ा चुकी है। वैसे तो भारत का वर्तमान लोकतंत्र अब काफी सशक्त हो चुका है परिपक्व भी हो चुका है,बस वर्तमान में इसे गम्भीरता से देखना भर है कि वेनेजुएला श्रीलंका नेपाल बांगलादेश में क्या हुआ है और उनसे तुलनात्मक अध्ययन करना है कि इस समय भारत के अन्दर क्या हो रहा है, और भारत में इसका परिणाम क्या हो सकता है। राष्ट्रहित में देखें तो सम्भव है कि किसे वर्ग समाज का कहीं कोई अहित हो रहा हो, लेकिन निजी अहित से कहीं बहुत ऊपर राष्ट्रहित देखना अत्यन्त आवश्यक है इसीलिए वर्तमान में देश के हालातों को देखते हुए हम सबको आगे कैसे सतर्क रहना है। विचारणीय है आगे आने वाले दिनों में वर्तमान मोदी सरकार को हटाने के लिए देश भर की सत्तातुर विपक्षी पार्टियां किसी भी तरह के निम्न स्तर तक जा सकतीं हैं। क्योंकि वेनेजुएला श्रीलंका बांगलादेश व नेपाल जैसे देशों को अराजकता की आग में झोंकने वाली विदेशी शक्तियां जो वहां जेन-जी के पीछे खड़ी थीं,वही शक्तियां यहां भारत में भी अपने पैरों को जमा रही हैं। भारत के सभी प्रबुद्ध नागरिक गण अपने बुद्धि एवं विवेक के संपूर्ण ज्ञान चक्षु खोलकर राष्ट्रहित का चिंतन करें, तभी देश को आने वाली अराजकता से बचाया जा सकता है, अन्यथा भविष्य भयावह ही होगा।

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