ओम जी पाठक
कानपुर देहात। ड्राइविंग लाइसेंस नवीनीकरण की प्रक्रिया में मेडिकल परीक्षण की अनिवार्यता पर एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। एक आवेदक ने सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी को प्रार्थना-पत्र देकर आरोप लगाया है कि वह अस्पताल गया ही नहीं, फिर भी उसके नाम से मेडिकल फिटनेस प्रमाण पत्र जारी दिखाया जा रहा है आवेदक उमेश चन्द्रा, DL No. UP78 20060003285, Application No. 4554552526 ने अपने शिकायती पत्र में बताया है कि उन्होंने लाइसेंस नवीनीकरण के लिए राकेश नामक व्यक्ति के माध्यम से आवेदन किया था।जब उन्होंने अपने आवेदन की स्थिति देखी तो उसमें डॉ. अशोक कुमार के नाम से मेडिकल परीक्षण दर्ज होना पाया गया।उमेश चन्द्रा ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वह स्वयं कभी जिला अस्पताल में मेडिकल जांच के लिए उपस्थित नहीं हुए और न ही डॉ. अशोक कुमार के समक्ष उनका कोई परीक्षण हुआ।उमेश ने अपनी वास्तविक स्वास्थ्य स्थिति का भी उल्लेख किया है। उनके अनुसार उनकी दाहिनी आँख से दिखाई देता है, जबकि बाईं आँख से दिखाई नहीं देता। ऐसी स्थिति में विधिवत नेत्र परीक्षण के बिना लाइसेंस का नवीनीकरण सड़क सुरक्षा के लिए भी जोखिम भरा है।आवेदक ने कहा है कि उनके नाम से फर्जी तरीके से मेडिकल प्रमाण पत्र कैसे जारी हुआ, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है और इस अनियमितता में उनकी कोई भूमिका नहीं है।पीड़ित ने एआरटीओ कानपुर देहात से मांग की है कि उसके आवेदन में दर्ज मेडिकल प्रमाण पत्र की निष्पक्ष जांच कराई जाए और उसे जिला अस्पताल के मेडिकल बोर्ड के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर पुनः वास्तविक मेडिकल परीक्षण कराने का अवसर दिया जाए।उसने यह भी अनुरोध किया है कि उसके लाइसेंस पर निर्णय उसकी वास्तविक मेडिकल स्थिति के आधार पर ही लिया जाए।इस मामले के सामने आने के बाद ए,आर,टी,ओ कार्यालय में दलालों के माध्यम से बिना उपस्थिति के मेडिकल सर्टिफिकेट जारी होने की चर्चाओं को और बल मिल गया है।
