महानाट्य “मेरे कृष्ण” में हो रही है तीनों युगों की अनुभूति

दिनेश दुबे

लखनऊ । ख्यातिलब्ध कवि एवं साहित्यकार डॉ नरेश कात्यायन लिखित एवं बहुमुखी प्रतिभा के धनी राजीव सिंह दिनकर द्वारा निर्देशित महानाट्य “मेरे कृष्ण” ने कला मंच की दुनियां में धमाल मचा रखा है ! कर्ण प्रिय गीत, सुमधुर संगीत और बहुरंगी प्रकाश के बीच महज तीन घंटे में योगीराज श्रीकृष्ण लीला की सजीव प्रस्तुति देख दर्शक न सिर्फ भाव विभोर हो रहे हैं, बल्कि पात्रों की संवाद अदायगी में त्रेता, द्वापर और कलियुग तीनों युगों की अनुभूति कर रहे हैं ! यूपी की राजधानी लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के ज्यूपिटेर हॉल में बहुरंगी रोशनी के मध्य सुमधुर श्रीकृष्ण आरती की ध्वनि जैसे ही धीमी हुई और पर्दा उठा, तो देखा श्वेत वस्त्रधारी पितामह भीष्म के प्रस्ताव पर सम्राट युधिष्ठिर सिंहासन पर विराजमान श्रीकृष्ण की पूजा का उपक्रम कर रहे हैं। इस बीच सभा से उठते हुए चेदीराज शिशुपाल पांडवों के साथ ही पितामह भीष्म को भी अपशब्दो से संबोधित कर श्रीकृष्ण का विरोध करने लगता है ! वीर रस की काव्य शैली में शिशुपाल का वक्तव्य अभी खत्म भी नहीं हुआ था कि तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा हॉल गूंज उठा ! भीष्म और युधिष्ठिर के रोकने पर भी जब शिशुपाल नहीं थमा तो बलराम ने श्रीकृष्ण को धिक्कारते हुए अभिनय की जो प्रस्तुति दी, वो दर्शकों को स्तब्ध कर गई। किंतु श्रीकृष्ण ने पांडवों की सभा में जब शिशुपाल को चेतावनी देते हुए बुआ को दिए गए सौ अपराध क्षमा करने वाले वचन की याद दिलाई तो पूरे हॉल में सन्नाटा छा गया ! सन्नाटे में शामिल दर्शक के तौर पर इस कलमकार ने जो देखा-समझा, वो कलाकारों के लिए तो काबिले तारीफ है ही, नाट्य निर्माताओं के साथ ही उन दर्शकों के लिए अकल्पनीय जैसा है, जिन्होंने ये महानाट्य देखा नहीं है ! इसका प्रमाण यह है कि शो का जिस समय मध्यांतर हुआ उस समय शो देख रहे प्रदेश के उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने यूपी विधानसभा के पूर्व अनुसचिव व महानाट्य के लेखक डॉ नरेश कात्यायन और निर्माता निर्देशक राजीव सिंह दिनकर, विवेक गुप्ता एवं विष्णु पाटिल से मुलाकात कर महानाट्य की सराहना करते हुए शो को पूरा देखे बगैर ही अद्वितीय बता डाला। महानाट्य में श्रीकृष्ण की भूमिका निभा रहे हैं सुप्रसिद्ध अभिनेता सौरभ राज जैन, महामाया और राधा की भूमिका में है पूजा शर्मा, दुर्योधन और कंस का जीवंत अभिनय कर रहे हैं अर्पित रंका, शकुनि और विराग की भूमिका में हैं पृथ्वी केशरी, सुदामा और जरा नामक बहेलिया की भूमिका में हैं मनीष राजपूत, बर्बरीक बने हैं संदीप सिंह, भीम की भूमिका में हैं कृष्ण जायसवाल, बलराम के रूप में अद्वित प्रताप, भीष्म और महर्षि दुर्वासा की भूमिका में अनूप शुक्ला, धृतराष्ट्र की भूमिका में पारितोष श्रीवास्तव और शिशुपाल की भूमिका में टाईगर कामथ श्रेष्ठ अभिनय कर रहे हैं ! श्रीदामा और साम्ब की भूमिका में विशाल कुमार, सहदेव के रूप में ओम पाटिल, युधिष्ठिर के रूप में अतुल वर्मा, अर्जुन के रूप में श्रीकांत द्विवेदी, उद्धव और कर्ण के रूप में हिमांशु जिन्सी, युवा कृष्ण के रूप में अर्जुन कौशिक और युवा राधा के रूप में प्रणाली घोघरे भूमिका निभा रहीं हैं ! यशोदा की भूमिका में यशु धीमान, द्रोपदी और गांधारी के रूप में अलिका नायर, रुक्मिणी के रूप में अशना किशोर, ललिता और विभा के रूप में संस्कृति पटोले तथा प्रभा के रूप में अपने अभिनय का जादू बिखेर रहीं हैं अन्नू स्वामी ! महानाट्य के संगीतकार हैं उद्भव ओझा, गीतकार डॉ नरेश कात्यायन, अमित मारू और फणींद्र राव के साथ गायक हैं शानू, उद्भव ओझा और पलक मुच्छल ! डेढ़ हजार सीटों की संख्या वाले खचाखच भरे हॉल में तीन घंटे के दौरान कलाकारों की सजीव प्रस्तुति से दर्शक कई बार भाव विह्वल होकर न सिर्फ आँसूं पोछते हैं बल्कि तालियों की गड़गड़ाहट से सन्नाटे को चीरते भी हैं…अलौकिक प्रतिभा के धनी हैं डॉ नरेश कात्यायन ! तीन दशक पहले वीर रस के जिस कवि का समय न मिलने के कारण आयोजक कवि सम्मेलन की तिथियां स्वयं बदल लेते थे, वीर रस के उस कवि को ज्यादातर लोग “डॉ नरेश कात्यायन” के नाम से जानते हैं । जबकि उनका असली नाम है डॉ राम नरेश मिश्र ! डॉ कात्यायन पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी और यूपी विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष केशरीनाथ त्रिपाठी के चहेते कवियों में एक हैं । लखीमपुर खीरी के मूल निवासी डॉ कात्यायन भले ही खुद को लखनऊ वासी बताते हों, परन्तु नियति ने अभी तक उनका निवास स्थान निर्धारित नहीं किया है ! जन्म भूमि से दूर होकर जीवन यापन के लिए डॉ कात्यायन होम्योपैथी चिकित्सक के रूप में कई वर्ष कन्नौज में भी रहे । सन 1985 और 1990 के मध्य जब वे प्रयागराज में होम्योपैथ की डिस्पेंसरी चलाते थे, तब उनकी मुलाकात फिल्म निर्माता रामानंद सागर से हुई। उस समय डॉ कात्यायन देश के स्थापित कवियों में गिने जाते थे। डॉ कात्यायन के मुताबिक रामानंद सागर की रामायण को 1986 के अंत में काफी जद्दोजहद के बाद प्रधानमंत्री राजीव गांधी के हस्तक्षेप पर सूचना एवं प्रसारण मंत्री अजीत पांजा ने दूरदर्शन के नेशनल चैनल पर प्रसारण की अनुमति प्रदान की थी। 25 जनवरी 1987 से 31 जुलाई 1988 के मध्य रविवार की सुबह से 78 एपिसोड में प्रसारित हुई रामायण के खिलाफ बाल्मीकि समाज के लोगों ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में मुकदमा कर रखा था, मुकदमें की तारीख पर इलाहाबाद आये रामानंद सागर को उन्होंने अपने खंड काव्य “महात्मा जटायु” के अंतिम भाग “जटायु का महाप्रयाण” सुनाया तो रामानंद साहब भाव विभोर हो गए और फिर उन्होंने उत्तर रामायण के निर्माण में जटायु को महात्मा जटायु के रूप में प्रस्तुत किया था। वर्ष 1990- 91 के दौर में डॉ कात्यायन की विधान सभा में अनुभाग अधिकारी के पद पर नौकरी लग गयी ! जिसके बाद डॉ कात्यायन ने भारत ही नहीं, बल्कि विश्व स्तर पर हिंदी काव्य और साहित्य की जो सेवा वो किसी से छिपी नहीं है । डॉ कात्यायन द्वारा स्थापित “अखिल भारतीय मंचीय कवि पीठ” के जरिए देश- विदेश के विभिन्न शहरों में अंतरराष्ट्रीय हिन्दी कविता समारोह आयोजित किए गए जिसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिंदी की सेवा करने वाले ख्यातिलब्ध साहित्यकारों का सम्मान किया गया ! पिछले एक दशक से डॉ कात्यायन हिंदी काव्य मंचों पर कविता पाठ करने के बजाय पौराणिक कथाओं पर शोध करते हुए ऐसे नाटक लिख रहे हैं जिन्हें देखने के बाद दर्शक आश्चर्यचकित हैं । डॉ कात्यायन द्वारा बॉलीवुड के चरित्र अभिनेता पुनीत इस्सर के लिए लिखा गया महानाट्य “महाभारत” वर्ष 2020 में काफी चर्चित हुआ, जिसके बाद डॉ कात्यायन ने पुनीत इस्सर के लिए “कामचक्र” नामक नाटक लिखा जो अभी मंचित नहीं हुआ है ! पुनीत इस्सर के लिए ही वर्ष 2022 में लिखा गया महानाट्य “जय श्रीराम” देश ही नहीं बल्कि विदेश में भी मंचित हो रहा है ! दशकों से देश विदेश की राम लीलाओं में श्रीराम की भूमिका निभाने वाले दिल्ली निवासी राहुल भूचर के लिए डॉ कात्यायन द्वारा लिखे गए महानाट्य “हमारे राम” ने 25 जनवरी 2024 से देश-विदेश में धूम मचा रखी है। कारण “हमारे राम” में दशानन रावण की भूमिका निभाने वाले फिल्म अभिनेता आशुतोष राणा खुद में शिव स्त्रोत के विद्वान हैं ! डॉ कात्यायन द्वारा अवध के राम, लंकेश, हमारे महादेव, हमारे हनुमान तथा “मेरे कृष्ण” जैसे महानाट्य लिखे हैं ।

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