हुई समाजवादी गोलबंदीमहंगाई, बेरोजगारी और किसानों की बदहाली पर उठाए सवाल; ग्रामीणों से बोलीं सिर्फ नेताओं का स्वागत नहीं, अपने हक के लिए जवाब भी मांगिएमुकेश कुमार पीलीभीत। समाजवादी पार्टी की महिला सभा की राष्ट्रीय सचिव एवं बीसलपुर विधानसभा क्षेत्र की पूर्व प्रत्याशी दिव्या प्रदीप गंगवार ने पीडीए पंचायतों के जरिए ग्रामीण राजनीति के केंद्र में हक, हिस्सेदारी और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही का सवाल खड़ा किया है। गांव-गांव जनसंपर्क के दौरान उन्होंने लोगों से सीधा सवाल करते हुए कहा कि “अगर सरकार पराई है तो आप उसे वोट क्यों दे रहे हैं?” उनके इस सवाल के जरिए ग्रामीणों को अपने मत की ताकत पहचानने और अपने अधिकारों के लिए आवाज बुलंद करने का संदेश दिया गया।सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर चल रहे जनसंपर्क अभियान में दिव्या प्रदीप गंगवार ने कहा कि लोकतंत्र में जनता का वोट केवल सरकार बनाने का माध्यम नहीं, बल्कि अपने भविष्य, सम्मान और अधिकारों का फैसला करने की ताकत है। जब जनता अपने सांसद और विधायक चुनती है तो उसे उनसे विकास, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा जैसे बुनियादी सवालों पर जवाब भी मांगना चाहिए। जनता की समस्याएं चुनाव के समय याद करने और बाद में उन्हें नजरअंदाज करने की राजनीति अब नहीं चलनी चाहिए।उन्होंने ग्रामीणों की रोजमर्रा की समस्याओं का जिक्र करते हुए कहा कि जब किसी गांव से स्कूल तीन किलोमीटर दूर होता है तो अभिभावकों को बच्चों की पढ़ाई के साथ उनकी सुरक्षा और आने-जाने की चिंता भी सताती है। गांवों में बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना जनप्रतिनिधियों की प्राथमिकता होनी चाहिए। केवल आश्वासन देने से गांवों की तस्वीर नहीं बदलेगी, इसके लिए जवाबदेही तय करना जरूरी है।स्वागत-सम्मान से नहीं, सवाल पूछने से बदलेगी तस्वीरदिव्या प्रदीप गंगवार ने ग्रामीणों से कहा कि जब मंत्री या जनप्रतिनिधि गांव में आएं तो केवल स्वागत-सम्मान तक सीमित न रहें, बल्कि अपनी समस्याएं भी उनके सामने रखें। किसानों को मुआवजा चाहिए, कर्ज से राहत चाहिए, खाद-बीज की उपलब्धता चाहिए तो उन्हें खुलकर सवाल पूछने चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता की समस्याओं का समाधान तभी होगा, जब लोग अपने अधिकारों को लेकर जागरूक होंगे और जिम्मेदार लोगों से जवाब मांगेंगे। उन्होंने आवारा पशुओं की समस्या का उदाहरण देते हुए कहा कि करीब चार वर्ष पहले मंडी में आवारा पशुओं को पकड़ने के लिए ट्रॉली भेजे जाने की बात सामने आई थी। ग्रामीणों को यह भी पूछना चाहिए कि उसके बाद समस्या के समाधान के लिए क्या कदम उठाए गए और आवारा पशुओं से फसलों को होने वाले नुकसान पर रोक लगाने के लिए क्या व्यवस्था हुई। उनका कहना था कि किसी समस्या पर एक बार कार्रवाई का दिखावा पर्याप्त नहीं, उसका स्थायी समाधान होना चाहिए।सपा सरकार की योजनाएं गिनाकर भाजपा पर साधा निशानाजनसंपर्क के दौरान समाजवादी पार्टी की पूर्ववर्ती सरकार की योजनाओं का उल्लेख करते हुए दिव्या प्रदीप गंगवार ने समाजवादी पेंशन, कन्या विद्या धन, लैपटॉप वितरण, 108 एंबुलेंस सेवा और डायल-100 जैसी व्यवस्थाओं को याद कराया। उन्होंने कहा कि राजनीति का मूल्यांकन नारों से नहीं, बल्कि इस बात से होना चाहिए कि आम जनता को शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और रोजगार के क्षेत्र में क्या मिला। उन्होंने महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की समस्याओं, महिलाओं की सुरक्षा और युवाओं के भविष्य को प्रमुख मुद्दा बताते हुए कहा कि इन सवालों पर जनता को अपनी आवाज बुलंद करनी होगी। पीडीए की एकजुटता पर जोर देते हुए उन्होंने पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज से सामाजिक न्याय और संवैधानिक अधिकारों के लिए संगठित होने की अपील की।2027 की तैयारी में गांवों पर सपा का फोकसपीडीए पंचायतों को वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़ते हुए दिव्या प्रदीप गंगवार ने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि राजनीतिक बदलाव के लिए केवल चुनाव के समय सक्रिय होना पर्याप्त नहीं है। जनता के बीच लगातार रहना, उनकी समस्याओं को समझना और उनके समाधान के लिए संघर्ष करना जरूरी है।इस दौरान चौधरी प्रदीप सिंह पटेल, रूपलाल महतिया, सालिक राम गंगवार, नन्हे लाल, रवि कृष्ण मौर्य, रविंद्र कश्यप, विजय पाल वर्मा, राकेश कुमार, अश्वनी कुमार वर्मा, हरेंद्र पाल, ओमपाल गंगवार, मेराज हुसैन, हसमत अली, बुंदन सलमानी, प्रेमपाल भारती, चंद्रपाल रस्तोगी, अवि गंगवार, ताज मोहम्मद, निरंजन स्वरूप गौतम, भूदेव गंगवार, अनिल गौतम सहित समाजवादी पार्टी के पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
दिव्या प्रदीप गंगवार ने पीडीए पंचायतों से फूंका सियासी बिगुल, 2027 के लिए गांवों में तेज
