राठ में फिर ताल ठोकने की तैयारी में गयादीन अनुरागी, गठबंधन हुआ तो कांग्रेस के टिकट पर लड़ेंगे चुनाव

राठ में फिर ताल ठोकने की तैयारी में गयादीन अनुरागी

2012 में कांग्रेस के टिकट पर बने थे विधायक, 2022 में सपा से टिकट की उम्मीद टूटी; अब 2027 के चुनाव में फिर सक्रिय होने के संकेत
जगदीश श्रीवास्तव
राठ/हमीरपुर। बुंदेलखंड की राठ विधानसभा सीट पर 2027 के चुनाव की आहट के साथ पुराने सियासी चेहरों की सक्रियता भी बढ़ने लगी है। इसी कड़ी में पूर्व विधायक गयादीन अनुरागी एक बार फिर चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में हैं। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच गठबंधन को लेकर तस्वीर अभी साफ नहीं है, लेकिन अनुरागी का कहना है कि समझौता होने पर राठ सीट कांग्रेस के खाते में आने की उम्मीद है। गठबंधन नहीं हुआ, तब भी वह कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं। ऐसे में राठ की सियासत में उनकी संभावित वापसी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। प्रदेश में भाजपा की चुनावी सक्रियता बढ़ने और विपक्षी दलों के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर जारी अटकलों के बीच राठ में भी राजनीतिक गुणा-भाग शुरू हो गया है। कांग्रेस और सपा के बीच गठबंधन की संभावनाओं पर नजरें टिकी हैं। दोनों दलों के स्थानीय नेताओं के बीच बयानबाजी और सीटों को लेकर खींचतान की खबरों ने असमंजस बढ़ाया है। हालांकि, गठबंधन होगा या नहीं और राठ सीट किस दल के हिस्से आएगी, इस पर अभी कोई अंतिम तस्वीर सामने नहीं है। गयादीन अनुरागी ने छात्रसंघ की राजनीति से अपना सार्वजनिक जीवन शुरू किया था। झांसी विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति से निकलकर वह जिला पंचायत सदस्य बने और फिर वर्ष 2012 में कांग्रेस के टिकट पर राठ विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े। उस चुनाव में उन्होंने समाजवादी पार्टी की प्रत्याशी और पूर्व विधायक अम्बेश कुमारी को हराकर सबको चौंका दिया था। वह हमीरपुर-महोबा क्षेत्र से कांग्रेस के प्रमुख चेहरों में शामिल हो गए थे। 2012 में प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनने और अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री बनने के बावजूद राठ में कांग्रेस की जीत ने अनुरागी को अलग पहचान दिलाई। क्षेत्र में उनकी राजनीतिक सक्रियता, लोगों के सुख-दुख में शामिल होने और जरूरतमंदों की मदद करने की शैली को उनकी लोकप्रियता का आधार माना जाता है। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में गयादीन अनुरागी ने कांग्रेस के टिकट पर दोबारा चुनाव लड़ा, लेकिन इस बार उन्हें भाजपा की मनीषा अनुरागी से हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद भी क्षेत्रीय राजनीति में उनकी सक्रियता बनी रही। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने कांग्रेस छोड़कर समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया था। बताया जाता है कि उन्हें सपा से टिकट मिलने की उम्मीद थी, लेकिन पार्टी ने अंतिम समय में किसी अन्य महिला प्रत्याशी को मैदान में उतार दिया। इससे अनुरागी की चुनाव लड़ने की संभावना समाप्त हो गई और उन्हें राजनीतिक झटका लगा। उनके समर्थकों का मानना रहा कि टिकट नहीं मिलने से क्षेत्र में उनके प्रभाव वाले मतदाताओं के एक हिस्से में सपा के प्रति नाराजगी पैदा हुई। हालांकि, इस नाराजगी के कारण सपा को कितनी सीटों पर नुकसान हुआ, इसका स्वतंत्र चुनावी आकलन उपलब्ध नहीं है। विधायक के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान गयादीन अनुरागी ने राठ नगर की पेयजल समस्या के समाधान के लिए मौदहा बांध से पानी लाने की योजना का मुद्दा उठाया था। स्थानीय स्तर पर इस योजना को भविष्य की पेयजल जरूरतों से जोड़कर देखा गया। हालांकि, योजना की वर्तमान स्थिति और अब तक हुई प्रगति का आधिकारिक ब्योरा अलग से जांचे जाने की जरूरत है। इसके अलावा राठ-हमीरपुर, उरई-पनवाड़ी वाया राठ, राठ-जालौन और राठ-चंडौत मार्गों के उच्चीकरण का काम भी उनके कार्यकाल के दौरान चर्चा में रहा। इन परियोजनाओं को लेकर क्षेत्र में सड़क संपर्क और आवागमन की सुविधा बेहतर बनाने की अपेक्षा की गई थी। आगामी विधानसभा चुनाव में राठ सीट पर विपक्षी गठबंधन का स्वरूप महत्वपूर्ण होगा। यदि कांग्रेस और सपा के बीच समझौता होता है, तो सीटों के बंटवारे में राठ किस दल को मिलती है, यह देखना होगा। अनुरागी का दावा है कि गठबंधन की स्थिति में यह सीट कांग्रेस के हिस्से में आ सकती है। हालांकि, सीट बंटवारे पर दोनों दलों की ओर से अंतिम घोषणा होने तक इसे संभावित राजनीतिक समीकरण के रूप में ही देखा जाना चाहिए। दूसरी ओर, भाजपा की ओर से भी चुनावी तैयारियां तेज होने की संभावना है। बहुजन समाज पार्टी की सक्रियता और प्रत्याशी चयन भी राठ के चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित इस सीट पर स्थानीय मुद्दों, प्रत्याशियों की सामाजिक स्वीकार्यता और दलों के बीच मतों के बंटवारे की भूमिका महत्वपूर्ण रह सकती है। गयादीन अनुरागी की संभावित वापसी से कांग्रेस को क्षेत्र में पुराने संगठनात्मक संपर्कों को फिर सक्रिय करने का अवसर मिल सकता है। वहीं, उनके सामने अपनी राजनीतिक स्थिति स्पष्ट करने और पिछले चुनावों के बाद बदले समीकरणों के बीच समर्थन जुटाने की चुनौती भी होगी। गयादीन अनुरागी के चुनाव लड़ने की तैयारी के संकेतों ने राठ की राजनीति में नई चर्चा जरूर शुरू कर दी है, लेकिन उनकी उम्मीदवारी, कांग्रेस-सपा गठबंधन और सीटों के बंटवारे पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। आने वाले समय में दलों की रणनीति और आधिकारिक घोषणाओं से स्थिति स्पष्ट होगी। फिलहाल अनुरागी की तैयारी का संदेश साफ है—गठबंधन हो या न हो, वह राठ की राजनीति में अपनी दावेदारी बनाए रखना चाहते हैं। अब देखना यह है कि कांग्रेस उन्हें उम्मीदवार बनाती है या विपक्षी दलों के बीच सीटों का समझौता उनकी चुनावी राह तय करता है।

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