बिधूना क्षेत्र में क्या पीडीए का बढ़ता जनाधार सियासतदारों का दिल है बेकरार
बिधूना औरैया। बिधूना विधानसभा क्षेत्र लंबे अर्से से सपा के मजबूत किले के रूप में शुमार माना जाता है वहीं हाल में संपन्न हुए विधान परिषद चुनाव में आगरा खंड शिक्षक क्षेत्र से सपा प्रत्याशी की जीत ने क्या इस बार भी साबित कर दिया है कि इस क्षेत्र में पीडीए का जादू सिर चढ़कर बोल रहा है। शिक्षक संवर्ग व पढ़ा लिखा वर्ग काफी हद तक सपा को पसंद कर रहा है इस बात की भी इस चुनाव ने कुछ ना कुछ पुष्टि अवश्य कर दी है। हालांकि विधान परिषद के संपन्न हुए चुनाव में सपा की ताकत भाजपा की अपेक्षाकृत अधिक मजबूत दिखने से भाजपा की चिंता और बेचैनी बढ़ना भी स्वाभाविक माना जा रहा है। . विधान परिषद चुनाव से आगरा खंड शिक्षक क्षेत्र से संबंधित जिलों में आगामी विधानसभा चुनाव में सपा को अधिक मजबूती मिलने की उम्मीद से सपाइयों की अभी से बांछे खिली नजर आ रही है वहीं बिधूना विधानसभा क्षेत्र के सपाई तो सबसे अधिक उत्साहित नजर आ रहे हैं। वैसे मौजूदा समय में भी बिधूना विधानसभा सीट सपा के ही कब्जे में है और इस सीट पर रेखा वर्मा विधायक हैं। हालांकि इस विधानसभा क्षेत्र में भाजपा, बसपा, कांग्रेस भी इस सीट को सपा से छीनने की प्रत्येक चुनाव में हर संभव कोशिशें करती नजर आती है लेकिन मौजूदा समय में क्षेत्रीय जातीय समीकरण के जोड़ गणित के सहारे सपा की चुनावी वैतरणी यहां आसानी से पार हो जाती है। बिधूना विधानसभा क्षेत्र के जातीय समीकरणों के साथ मौजूदा हालात सपा के पक्ष में रहने के चलते सपा की कामयाबी का प्रमुख कारण माना जाता है। मौजूदा सपा विधायक रेखा वर्मा पुराने समाजवादी राजनीतिक करने से ताल्लुक रखती हैं और उनके ससुर एवं उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष रहे स्वर्गीय धनीराम वर्मा इस सीट पर कई बार विधायक चुने गए थे वहीं रेखा वर्मा के पति स्वर्गीय डॉ महेश वर्मा भी विधायक रहे हैं। जमीनी धरातल धरातल पर देखने में आ रहा है मौजूदा सपा विधायक रेखा वर्मा के पुत्र एवं उनके प्रतिनिधि डॉ नवीन वर्मा भी क्षेत्रीय जनता में अपनी मजबूत पैठ बनाने की हर संभव कोशिश करते दिख रहे हैं। सपा विधायक रेखा वर्मा की बिरादरी का भी क्षेत्र में खासा वोट है और इस सजातीय मतदाताओं पर रेखा वर्मा का खासा प्रभाव भी माना जाता है इसी के साथ उनकी समाज के अन्य वर्ग में मजबूत पकड़ का परिणाम है कि स्वर्गीय धनीराम वर्मा का राजनीतिक घराना आज तक बिधूना विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में अपना वर्चस्व बनाए नजर आ रहा है। अनुसूचित जाति जनजाति एक्ट को प्रभावी किए जाने से अधिकांश तथाकथित सवर्ण इसके दुरुपयोग से चिंतित हैं वहीं यूजीसी कानून लाए जाने से भी मौजूदा सरकार से नाराज नजर आ रहे हैं वहीं सवर्ण मतदाताओं का यहां बिखराव भी फिलहाल भाजपा के लिए कोई शुभ संकेत नजर नहीं आ रहे। इतना ही नहीं दूसरी ओर क्षेत्र में बसपा की गतिविधियां सुस्त रहने के चलते बसपा के परंपरागत जेबी वोट बैंक के बड़े हिस्से के भी बसपा छिंटक कर अन्य दलों में अपना ठिकाना ढूंढ लेने के चलते इस क्षेत्र में बसपा की चुनावी डगर भी पिछले कई चुनावों से कठिन होती नजर आ रही है। 2027 के बिधूना विधानसभा क्षेत्र में फिलहाल सभी दलों के सियासतदार जातीय समीकरणों के सहारे चुनावी बैतरणी पार करने की हर संभव कोशिशों में अभी से जुटे नजर आ रहे हैं लेकिन मौजूदा जातीय चुनावी समीकरणों को अपने पक्ष में मानकर सपाई बेहद खुश नजर आ रहे हैं वहीं भाजपाइयों व बसपाइयों के साथ अन्य राजनीतिक दलों के सियासतदार भी 2027 का विधानसभा चुनाव फतह करने के प्रति काफी उत्साह से मतदाताओं को रिझाने पटाने में जुटे हुए हैं लेकिन संपन्न हुए विधान परिषद चुनाव में सपा की ताकत भाजपाइयों की अपेक्षा के मुताबिक अधिक बढ़ने से अचानक प्रमुख राजनीतिक दलों की सियासतदारों की चिंता और बेचैनी 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर और अधिक बढ़ती नजर आ रही है। हालांकि चुनाव में किस करवट ऊंट बैठेगा यह फिलहाल भविष्य के गर्भ में है।
