भाजपा की चिंता बनी, सपाई दिख रहे उत्साहित क्या विधानसभा चुनाव के पूर्व भाजपा कर पाएगी हतोत्साहित
आनंद कुशवाहा।
बिधूना- औरैया। विधान परिषद चुनाव में आगरा खंड शिक्षक क्षेत्र में भाजपा को सपा प्रत्याशी से मिली करारी से शिकस्त के बाद औरैया जिले में सपाइयों का उत्साह जहां अचानक और अधिक बढ़ गया है वहीं चुनाव में अपेक्षाकृत सफलता न मिलने को लेकर प्रदेश की सत्ता पर काबिज भाजपा के खेमे में फिलहाल इस पराजय से चिंता और बेचैनी बढ़ी नजर आ रही है। औरैया जिले की बिधूना दिबियापुर औरैया सदर समेत तीनों सीटों पर आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव के दृष्टिगत सपाई आसानी से चुनाव फतह करने की उम्मीद से खुशी से इतराते नजर आने लगे हैं। हालांकि अभी तक जिले की तीन सीटों में से दो सीटें बिधूना व दिबियापुर सपा के कब्जे में ही है वहीं आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव में औरैया सदर सीट पर भी सपाई कब्जा होने के सपने संजोए हुए है। जहां एक ओर एमएलसी चुनाव में सपा को मिली सफलता ने सपाइयों का उत्साह चौगुना कर दिया है वहीं दूसरी ओर भाजपा खेमे में चिंता और बेचैनी भी अचानक बढ़ती नजर आ रही है। जिले के निष्ठावान भाजपाइयों का आमतौर पर कहना है कि भाजपा संगठन के जिम्मेदार सियासतदारों द्वारा विधानसभा चुनाव के पूर्व यदि जल्द भाजपा के मजबूत जनाधार में हो रही सेंधमारी के पहलुओं पर चिंतन मंथन कर खामियां दूर करने पर गंभीरता से विचार न किया गया तो आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा अपना वर्चस्व कायम रख सकेगी यह कह पाना मुश्किल होने की बात से इन्कार नहीं किया जा सकता है। हालांकि सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा अपने नेताओं कार्यकर्ताओं व समर्थकों का आवाहन किया जा चुका है कि वह विधान परिषद चुनाव में हुई पीडीए की जीत पर होश ना खोए बल्कि पूरी ताकत से विधानसभा चुनाव में पीडीए की सरकार बनाने के लिए अभी से अधिक से अधिक लोगों को पीडीए के साथ जोड़ने में अपनी पूरी ताकत झोंक दें। ऐसा नहीं है कि भाजपा विधान परिषद चुनाव में अपेक्षा के अनुसार सफलता न मिलने पर चुप बैठ गई है बल्कि भाजपाई भी पूरी ताकत से चुनाव में अपनी असफलता के कारणों पर चिंतन मंथन कर और खामियां दूर कर 2027 के विधानसभा चुनाव में पुनः भाजपा की सरकार बनाने के लिए अपनी रणनीति बनाने में अभी से जुटती नजर आ रही हैं। हालांकि जनचर्चा तो आम यह भी है कि यूजीसी एक्ट व एससी एसटी एक्ट जैसे मुद्दे सामने आने के साथ शिक्षित बेरोजगारों युवाओं का आक्रोश भी विधान परिषद चुनाव में भाजपा की असफलता का प्रमुख कारण होने की बात से इन्कार नहीं किया जा सकता है। हालांकि फिलहाल विधान परिषद चुनाव से जहां सपाई सफलता हासिल करने से उत्साहित होकर विधानसभा चुनाव में सरकार बनाने के सपने संजोए हुए हैं वहीं भाजपाई भी विधान परिषद चुनाव में रही खामियां दूर करने और 2027 का विधानसभा चुनाव फतह करने की हर संभव कोशिशों में अभी से जुट गए हैं।
