बुंदेलखंड में बदले मौसम ने बिगाड़ा खेती-किसानी का गणित, बारिश और तेज हवाओं की आशंका से किसान परेशान
संदीप धुरिया
भरुआ सुमेरपुर ।अक्टूबर के अंतिम दिनों में मौसम के अचानक करवट लेने से बुंदेलखंड के सभी जनपदों में किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं। आसमान में छाए बादल, बारिश की संभावना और मौसम में आए बदलाव ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। खेतों में तैयार खड़ी धान की फसल और कटाई के इंतजार में बैठे किसानों को अब मौसम की मार का डर सताने लगा है।
दरअसल, इस समय कई क्षेत्रों में धान की फसल पककर तैयार हो चुकी है। किसान कटाई और मड़ाई की तैयारी में जुटे हैं। ऐसे में बेमौसम बारिश और तेज हवाएं किसानों के लिए मुसीबत बन सकती हैं। तेज हवाओं से खेतों में खड़ी धान की फसल गिरने और बारिश से खेतों में पानी भरने का खतरा है। वहीं, जिन किसानों ने धान की कटाई कर फसल खेतों या खुले स्थानों पर रखी है, उन्हें उसके भीगने और गुणवत्ता प्रभावित होने की चिंता सता रही है।
मौसम में आए बदलाव का असर केवल खरीफ की फसल तक सीमित नहीं है। बारिश के कारण खेतों में नमी बढ़ने से रबी सीजन की तैयारियों पर भी असर पड़ सकता है। किसान गेहूं, चना, मटर और सरसों की बुवाई के लिए खेत तैयार करने में जुटे हैं। ऐसे में लगातार बारिश होने पर खेतों की तैयारी और बुवाई का काम प्रभावित हो सकता है। सब्जी उत्पादक किसानों के सामने भी फसलों को सुरक्षित रखने की चुनौती खड़ी हो गई है।मौसम संबंधी पूर्वानुमानों के अनुसार 30 अक्टूबर को प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम खराब रहने की संभावना जताई गई है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ बारिश तथा ओलावृष्टि की आशंका भी व्यक्त की गई है। जालौन में पिछले दिनों बारिश के बाद मौसम में बदलाव देखा गया है, जबकि हमीरपुर में भी बादलों की आवाजाही बनी हुई है। हालांकि दोनों जनपदों में फसल नुकसान का कोई प्रमाणित सरकारी आंकड़ा अभी सामने नहीं आया है। मौसम के बदले मिजाज को देखते हुए किसानों की निगाहें अब प्रशासन और कृषि विभाग पर टिकी हैं। किसानों का कहना है कि यदि बारिश और तेज हवाओं का दौर जारी रहा तो तैयार फसल को नुकसान पहुंच सकता है। ऐसे में प्रभावित क्षेत्रों में समय रहते सर्वे कराकर वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाना चाहिए, ताकि नुकसान होने पर पात्र किसानों को नियमानुसार राहत मिल सके।फिलहाल किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी मेहनत से तैयार की गई फसल को मौसम की मार से बचाने की है। सालभर की मेहनत और लागत के बाद जब फसल घर पहुंचने का समय आया है, तब मौसम की बेरुखी ने किसानों के चेहरों पर चिंता और निराशा ला दी है।
