रियल मीडिया नेटवर्क
भरुआ सुमेरपुर।कस्बे की वर्णिता संस्था के तत्वावधान में सत्तावनी समर के महान सूरमा नाना साहब पेशवा की जयंती धूमधाम के साथ मनाई गई।
संस्था के अध्यक्ष डॉ.भवानीदीन ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि देश के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में नाना साहब की प्रभावी भूमिका थी। इनका जन्म 19 मई 1824 को नारायण भट्ट एवं गंगाबाई के घर बिठूर में हुआ था। वह कुशल रणनीतिकार थे। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में महारानी लक्ष्मीबाई,कुंवर सिंह,तात्या टोपे के अलावा नाना साहब का आंदोलन बहुत ही प्रभावी था। कानपुर विद्रोह की कमान नाना साहब ने संभाली थी। उस समय इनका कानपुर में कब्जा भी हो गया था। सन सत्तावन का संग्राम देशी रियासतों के शासकों की कमी, एकजुटता के अभाव और भितरघात के कारण असफल रहा। बाद में नाना साहब नेपाल चले गये। जहां पर 24 सितम्बर 1859 को इनका निधन हो गया। कार्यक्रम में दिलीप अवस्थी, दस्सी, बाबूलाल,सिद्धा,रिचा, महावीर, संतोष,अनिल,प्रेम, विकास आदि शामिल रहे।

