अफसर की अफसरी का जलवा -ए- जलाल आसमान पर


विशेष संवाददाता
राठ हमीरपुर। अपनी पहली पोस्टिंग में ही भौकाल बनाने के लिए प्रयासरत उपनिबंधक राठ अपने विभागीय कर्मियों को तो हड़काती ही हैं,निजी खरीद दारी में सस्ता लेने के चक्कर में व्यवसाईयों को भी हड़काने का प्रयास करती हैं। अपने वाहन में आगे-पीछे उoप्रo सरकार की प्लेट भी लगाए हुए है।
जब इस विषय में उप निबंधक दीप्ति सिंह से बात की गई, तो उन्होंने बड़ी ही साफगोई के साथ कहा कि मैं सरकारी कार्य हेतु अपने वाहन में भी उत्तर प्रदेश सरकार की पट्टी लगा सकती हूं।
नगर के एक व्यवसायी ने बताया कि उपनिबंधक कुछ समय पूर्व उनके यहां सामान लेने आईं थी। जिसमें वह दामों में छूट चाहती थी, जब दुकानदार ने उनसे फिक्स रेट के लिए कहा, तो वह अपने आपको वी वी आई पी बता कर हड़काने के जोश में आ गईं और अपने साथ आए सहयोगी से कहा कि अगर इनकी कुछ भूमि की खरीद फरोख्त हो, तो मुझे अवश्य सूचित करना और दुकानदार के बताएं मूल्य को अदा कर सामान लेकर चली गईं। उप निबंधक कार्यालय के हालात इतने बद्तर हैं कि कार्यावधि के बाद भी देर शाम तक यह खुला रहता है।उप निबंधक बहुधा नगर के कथित भूमाफियाओं के साथ वार्ता में व्यस्त रहती हैं।रिहायशी क्षेत्रों में धारा 80 के अधीन जिला अधिकारी की अनुमति की आवश्यकता नहीं होती। परंतु उपनिबंधन कार्यालय में क्रेताओं को इसका उलझाव दिखाकर और वसूली करके रजिस्ट्री कर दी जाती है। भू माफियाओं की आवासीय भूमि को बहुधा कृषक भूमि दर्शाकर स्टांप की चोरी की छूट देकर यहां रजिस्ट्री की जाती है। इस प्रकार से उत्तर प्रदेश सरकार को प्रतिमाह लाखों रूपयों की राजस्व हानि होती है।
लगभग ढाई माह पूर्व काफी शिकायतें आने पर क्षेत्रीय विधायक मनीषा अनुरागी का इस भ्रष्टाचार के विरुद्ध इसकी शिकायत प्रदेश सरकार में करने का आश्वासन भी समाचार पत्रों में प्रकाशित हुआ था। परंतु उस पर भी अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है। अगर रजिस्ट्रार ऑफिस का कोई सक्षम अधिकारी सत्यता से जांच करें, तो लाखों रुपए के घपले का पर्दाफाश सामने आ सकता है।

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