पंचायत चुनावों की आहट मिलते ही गांवों की राजनीति में बढ़ी गर्माहट


एन के यादव (रियल मीडिया नेटवर्क)
भरुआ सुमेरपुर। पंचायत चुनावों की आहट शुरू होते ही गांवों की राजनीति गरमाने लगी है। प्रधान पद के संभावित उम्मीदवारों ने मौजूद प्रधानों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। गत एक पखवाड़े में नजर डाली जाए तो तमाम ऐसे प्रकरण सामने आए हैं जिन्हें पंचायतों की राजनीति से जोड़ करकर देखा जा रहा है। इससे गांवों में गुटबाजी उत्पन्न होने लगी है। अभी इनमें और तेजी आने की उम्मीद है।
प्रदेश सरकार आगामी वर्ष अप्रैल मई माह में पंचायतों के त्रिस्तरीय चुनाव कराने की तैयारियों का ताना-बाना बुनने में जुटी है। इसके लिए आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं। राजनैतिक दलों के लिए पंचायत चुनाव काफी अहम होते हैं। लिहाजा राजनीतिक दल भी सरकार की सुगबुगाहट को ध्यान में रखकर तैयारियां करने लगे हैं। पंचायत चुनाव में अन्य चुनाव की तरह भाजपा, सपा, बसपा, कांग्रेस में मुकाबला होगा, यह तय है। पंचायत चुनाव की आहट शुरू होते ही गांवों की राजनीति गर्म होने लगी है। अभी आरक्षण आदि का कोई ठिकाना नहीं है इसके बावजूद प्रधान पद के संभावित उम्मीदवार अपनी राजनीति चमकाने के चक्कर में मौजूद प्रधानों के खिलाफ मोर्चा खोलने लगे हैं। पिछले एक पखवाड़े में घटित हुए घटनाक्रमों पर गौर किया जाए तो ब्लॉक की कई पंचायतों में शिकवा शिकायत का दौर तेज हुआ है। बिदोखर मेदनी, बिरखेरा आदि गांवों की शिकायते बढी हैं। ज्यादातर शिकायतकर्ता मौजूद प्रधानों को निशाने पर रखकर शिकायत कर रहे हैं। इसके पीछे उन ताकतों की अहम भूमिका है जिनको आगामी चुनाव में मैदान में आना है। शिकायतों का सिलसिला बढ़ने से गांवों का माहौल बिगड़ने की भी संभावना बन रही है। फिलहाल मौजूदा प्रधान बचाव की मुद्रा में आकर मामलों को बखूबी निपटा रहे हैं लेकिन पंचायत की राजनीति के जानकारों का मानना है कि समय ज्यों ज्यों नजदीक आएगा, शिकायतों का सिलसिला बढ़ेगा। अगर देखा जाए तो अभी यह तय नहीं है कि किस पंचायत का ऊंट आरक्षण में किस करवट बैठेगा। इसके बावजूद पंचायतों की राजनीति में गर्माहट लगातार बढ रही है। संभावित उम्मीदवार अभी से वोटो की लामबंदी में जुट गये हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *