खरीफ में दलहन का रकबा घटा, तिलहन का बढ़ा , तिल की फसल का बढ़ा रकबा


रियल मीडिया नेटवर्क
भरुआ सुमेरपुर। खरीफ में किसानों का रुझान अन्य फसलों की बजाय तिल की फसल की ओर बढ़ा है। किसान तिल एवं धान की फसल को ज्यादा तवज्जों दे रहा है। जहां पर सिंचाई के संसाधनों का अभाव है। वहां तिल की फसल पर अधिक बोई जा रही है।
बुंदेलखंड सदियों से दलहन एवं तिलहन का हब रहा है। रबी में चना,मटर,मसूर एवं खरीफ में अरहर,उड़द,मूंग प्रमुखता के साथ होता है। इसी तरह तिलहन में खरीफ में तिल का उत्पादन प्रमुखता के साथ किया जाता है। अन्य वर्षो की तुलना में इस वर्ष तिल का रकबा बढ़ा है। किसान सुरेश कुमार, उदयभान, मानसिंह भदौरिया,सत्यम सिंह, चंद्रपाल, देवीदीन,महेश कुमार, संतोष कुमार, घसीटा प्रसाद,प्रदीप कुमार ने बताया कि तिल की फसल कम बारिश में बगैर किसी लागत के तैयार हो जाती है। अरहर के अलावा मूंग उड़द के काम अवसर रहते हैं। इससे किसान उड़द,मूंग से बचता है। धान की फसल के लिए पानी की जरूरत होती है। इसलिए यह महज निजी नलकूप वाले किसान ही फसल उगाते हैं। बांकी किसान तिल की फसल को अधिक तवज्जो देते हैं। यही कारण है कि इसका रकबा प्रतिवर्ष बढ़ रहा है। इस वर्ष भी किसान तिल की फसल दबाकर बो रहा है। राजकीय बीज भंडार के प्रभारी विक्रम सिंह ने बताया कि शुक्रवार को 80 हेक्टेयर में बोने के लिए तिल का बीज किसान लेकर गए हैं। कृषि रक्षा इकाई के तकनीकी सहायक अजित शुक्ला बताते हैं कि तिल कम लागत में अधिक उत्पादन देने वाली फसल है। बोने के बाद इसमें किसी तरह की लागत नहीं आती है। इस वजह से किसान बुंदेलखंड में तिल का उत्पादन प्रमुखता के साथ करता है।
उड़द,मूंग सोयाबीन में है खतरा

भरुआ सुमेरपुर। खरीफ में कुछ हिस्सों में उड़द,मूंग,सोयाबीन को प्रमुखता दी जाती है। लेकिन इन फसलों में किसानों को ज्यादा खतरा नजर आता है। अतिवृष्टि,बाढ़, सूखा इनके लिए जहर के समान है। इससे किसान इन फसलों को बोने से अब कतरने लगा है और धान एवं तिल की फसल को ही तवज्जो देता है। यही कारण है कि प्रतिवर्ष ज्वार, अरहर,मूंग,उड़द,सोयाबीन का रकबा खुद बखुद कम होता जा रहा है। यह चिंता का विषय है।

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