
स्पेशल रिपोर्टर रियल मीडिया नेटवर्क
हमीरपुर ।अभी कल ही मुख्य मंत्री ने खनन नीति की समीक्षा करके दिशा-निर्देश दिए हैं मगर सुमेरपुर कस्बे से होकर प्रतिदिन ओवरलोड बालू से भरे ट्रकों के काफिले बेधड़क गुजर रहे हैं, लेकिन इस अवैध कारोबार पर प्रशासन और संबंधित विभागों की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। वर्षों से चल रहे इस खेल से साफ जाहिर होता है कि बालू माफियाओं की पकड़ किस कदर मजबूत है और उनके तार कहां तक जुड़े हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि ओवरलोड ट्रक केवल नियमों की अनदेखी ही नहीं कर रहे, बल्कि इन भारी वाहनों से सड़कें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो रही हैं। हाईवे से पहले सुमेरपुर की आंतरिक सड़कें ट्रकों के बोझ तले चरमरा रही हैं। हैरानी की बात यह है कि रात के अंधेरे में यह ट्रक बेधड़क कानपुर, लखनऊ और अन्य शहरों के लिए रवाना हो जाते हैं, लेकिन पुलिस, परिवहन और खनन विभाग की आंखों पर मानो पट्टी बंधी है।
कई लोगों का मानना है कि इतने बड़े पैमाने पर ओवरलोडिंग तभी संभव है जब जिम्मेदार विभागों की मौन सहमति या मिलीभगत हो। सवाल उठता है कि जब आम लोग सड़कों पर खुलेआम ओवरलोड ट्रकों को देख सकते हैं तो फिर प्रशासन क्यों अनजान बना हुआ है? क्या यह महज लापरवाही है या फिर बालू माफिया से साठगांठ?
इस ओवरलोडिंग से न केवल सरकारी राजस्व को चूना लग रहा है, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ रहा है। नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस अवैध परिवहन पर तत्काल रोक लगाने के लिए कड़ी निगरानी और नियमित चेकिंग अभियान चलाए जाएं। दोषी ट्रक मालिकों और उनके संरक्षकों पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो, तभी सड़कें सुरक्षित रह पाएंगी और सरकारी खजाने को हो रहा नुकसान रुकेगा। अगर अब भी प्रशासन ने सख्ती नहीं दिखाई, तो यह अवैध कारोबार आने वाले समय में और विकराल रूप ले सकता है।
