50 दिन में दूसरी हत्या से दहशत में पूरा परिवार, पुलिस पर उठे सवाल

जगदीश श्रीवास्तव
राठ हमीरपुर। क्षेत्र के चिल्ली गांव में लोधी राजपूत समाज के सबसे बड़े परिवार में 50 दिनों के भीतर हुई दो हत्याओं ने पूरे गांव और आसपास के इलाके में दहशत फैला दी है। हत्या की घटनाओं से ग्रामीण ही नहीं, पुलिस महकमा भी सकते में है।जानकारी के मुताबिक चिल्ली गांव के बाबू हर प्रसाद सिंह इलाके के बेहद प्रतिष्ठित व्यक्ति रहे हैं। उन्होंने गांव में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए एक इंटर कॉलेज की स्थापना कराई थी, जो आज भी संचालित हो रहा है। उनके परिवार में करीब ढाई सौ सदस्य रहते हैं, जिनमें से 127 मतदाता हैं।पहली वारदात 22-23 मई की रात हुई थी। अनिल सिंह के घर में घुसकर बदमाशों ने उनकी पत्नी की लोहे के भारी टुकड़े से हत्या कर दी थी। आरोपियों ने घर में मौजूद चार साल की मासूम बेटी को भी पटककर मारने की कोशिश की, वहीं राजेश सिंह पर भी हमला कर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया गया था। राजेश सिंह का इलाज लंबे समय तक कानपुर के रीजेंसी अस्पताल में चला। इस मामले की जांच में पुलिस ने गांव के ही बाबूराम को एनकाउंटर के बाद गिरफ्तार कर लिया था। बाबूराम ने अपना जुर्म कबूल भी कर लिया, लेकिन परिजनों का आरोप है कि मासूम बच्ची लगातार तीन-चार लोगों की ओर इशारा करती रही, इसके बावजूद पुलिस ने किसी अन्य संदिग्ध की जांच नहीं की।
पहली घटना को 50 दिन भी नहीं हुए थे कि 5 जुलाई को एक और खौफनाक वारदात हो गई। राजेश सिंह के ही परिजन करीब 65 वर्षीय विजय बहादुर सिंह की हत्या गांव के बाहर ट्यूबवेल पर कर दी गई। परिजन बताते हैं कि विजय बहादुर दोपहर में खाना खाने के बाद ट्यूबवेल पर सो रहे थे, तभी किसी ने उनके सिर पर फावड़े से वार कर उनकी जान ले ली।दिनदहाड़े हत्या के बाद गुस्साए लोगों ने बुंदेलखंड एक्सप्रेस को भी जाम कर दिया। परिजनों का कहना है कि पहली घटना में पुलिस ने सिर्फ खानापूर्ति की और असली आरोपियों को पकड़ने में दिलचस्पी नहीं दिखाई। वहीं राजेश सिंह ने भी अस्पताल से लौटने के बाद बयान दिया कि वारदात वाली रात चार लोग बाइक से आए थे और उन पर लोहे के उपकरण से हमला कर घर के अंदर घुसे थे।
वर्तमान में पुलिस ने दूसरी हत्या के खुलासे के लिए तीन दिन का समय मांगा है, लेकिन परिवार और ग्रामीण पुलिस की कार्यशैली से नाखुश हैं। दोहरे हत्याकांड ने पूरे कुटुंब को दहशत में डाल दिया है और अब सबकी निगाहें पुलिस पर टिकी हैं कि क्या वह इस बार असली गुनहगारों को बेनकाब कर पाएगी या नहीं।

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