
36वीं पुण्यतिथि पर उनके व्यक्तित्व को सराहा
कानपुर। शुक्रवार को देवनगर स्थित आवास में आचार्य गोरेलाल त्रिपाठी की 36वीं पुण्यतिथि मनाई गई। जिसमें साहित्य, पत्रकारिता कला और संस्कृति से जुड़े लोग शामिल हुए। वक्ताओं ने कहा है आचार्य श्री विराट व्यक्तित्व के धनी और बहुआयामी बटवृक्ष थे। जिनके भीतर की ऊर्जा से अनेक लोगों ने अपने स्वरूप को समाज में निखारा।
मुख्य वक्ता डॉ.सुरेश अवस्थी ने कहा कि आचार्य गोरेलाल जी परशुराम के स्वरूप में जीवंत अभिनय के लिए अमर रहेंगे। वे तत्कालीन अभिनेताऑ के प्रेरणा पुरुष रहे। रामलीला की कुरीतियों का अकेले विरोध करने की क्षमता रखते थे। कहा विपरीत पात्र उनसे संवाद में भय खाते थे।
विधान परिषद सदस्य अरुण पाठक ने कहा कि उन्होंने आचार्य जी के पदचिन्हो पर चलकर समाज को नवीन दिशा देने की प्रेरणा का अवसर पाया। कहा कि संघ, सनातन, संस्कृति और धर्म की रक्षा में उन्होंने अपनी सम्पूर्ण शक्ति लगा दी। जगदीश द्विवेदी ने कहा आचार्य जी रामकथा के मर्म को समझते थे। लोग उनसे अपने प्रश्न हल करने के लिए आते और संतुष्ट होकर जाते थे।
कवि ओमनारायण शुक्ल ने उनसे जुड़े जीवन प्रसंगो पर गीतों के माध्यम से प्रकाश डाला। अशोक कुमार त्रिपाठी, मोहन मिश्र, डॉ.मनीष द्विवेदी और प्रवीण पाण्डेय सहित अन्य लोगों ने आचार्य गोरेलाल के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला।
समारोह में डॉ.रमेश चन्द्र शर्मा, महेश चन्द्र त्रिपाठी, डॉ.सुषमा सेंगर, वरिष्ठ पत्रकार एवं पूर्व रावण अभिनेता अवध दीक्षित, अशोक कुमार त्रिपाठी, गिरीश बाजपेयी, जगदीश द्विवेदी और प्रभाकांत मिश्र को सम्मानित किया गया।
इस मौके पर डॉ. विजय प्रकाश त्रिपाठी की नवीन कृति “भदेली बोलती है” का लोकापर्ण एमएलसी अरुण पाठक ने किया।
श्रद्धांजलि काव्य गोष्ठी में डॉ. सुरेश अवस्थी, सुरेन्द्र शशि, राजकुमार सचान, सुनीता तिवारी, सुरेन्द्र सीकर, अन्नू अवस्थी, डॉ. मधु प्रधान, विद्याशंकर अवस्थी, ओमनारायण शुक्ल, कनकलता गौर, सुषमा सेंगर ने काव्य धारा प्रवाहित की। समारोह का संचालन वरिष्ठ कवि श्रवण शुक्ल ने किया। धन्यवाद ज्ञापन संयोजक डॉ. विजय प्रकाश त्रिपाठी ने किया।
फोटो- पुस्तक का विमोचन।


