भरुआ सुमेरपुर। पुलिस एवं मानवाधिकार एक दूसरे के पूरक हैं। मानवाधिकार का उत्पीड़न परिवार, पड़ोस, समाज, शासन प्रशासन के द्वारा होता है। भ्रूण हत्या जघन्य अपराध है। विडम्बना यह है कि इसके लिए एक महिला ही दूसरी महिला को प्रेरित करती है। इसको पूरी तरह से बंद होना चाहिए। उक्त अधिकार राष्ट्रीय मानवाधिकार एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुराग चंद्रवंशी ने कस्बे के शिव मैरिज लॉन में आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते हुए व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि संगठन की पहल प्रदेश में केवल प्रदेश मानवाधिकार न्यायालय गठित हुए हैं। इस न्यायालयों में बगैर पुलिस के मुकदमा दर्ज किये सुनवाई किए जाने का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि महिला उत्पीड़न विवाह के बाद अधिक होते हैं इसलिए विवाह पूर्व काउंसलिंग की व्यवस्था होनी चाहिए। इससे महिला उत्पीड़न के मामले घटेंगे उन्होंने कहा कि पुलिस महज 7 फीसदी मामलों में ही मानवाधिकार उत्पीड़न करती है। राजस्व सहित अन्य विभागों में उत्पीड़न अधिक होते हैं। संगोष्ठी को प्रदेश महासचिव संजय यादव ने संबोधित किया। संचालन कर रहे जिलाध्यक्ष मुनीर खान ने सभी के प्रति आभार जताया। इस मौके पर विकास सिंह, राहिला परवीन, व्यापार मंडल अध्यक्ष महेश गुप्ता दीपू, एम एल अवस्थी, गणेश सिंह विद्यार्थी आदि मौजूद रहे।

