
किसान बोले गांवों की तरह 18 घंटे दे आपूर्ति
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भरुआ सुमेरपुर। महज दस घंटे की आपूर्ति होने से किसानों की धान रोपाई पिछड़ रही है। इससे किसानों में आक्रोश पनप रहा है। किसानों का कहना है कि गांवों की तरह कम से कम 18 घंटे आपूर्ति नलकूपों में होनी चाहिए। तभी किसानों का भला होगा। वर्तमान में धान रोपाई चरम पर है। लेकिन नलकूपों का महज 10 घंटे की आपूर्ति हो रही। विद्युत आपूर्ति कम होने से किसान समय पर धान रोपाई के लिए आहली नहीं कर पा रहे हैं। इससे धान की रोपाई प्रभावित हो रही है। विदोखर के किसान मानसिंह भदौरिया,सुरेश गुप्ता, धीरेंद्र,पप्पू शर्मा, अनूप श्रीवास,इंगोहटा के किसान राकेश सोनकर,चंद्रपाल, धनीराम साहू,चन्दपुरवा बुजुर्ग के किसान नरेंद्र पाल, रामबिहारी कुशवाहा, पलरा के राजा पाल, नवीन यादव, टेढ़ा के सौरभ सिंह, राजेंद्र यादव, पचखुरा बुजुर्ग के शिव सिंह,आसाराम यादव, देवगांव के गोपाल सिंह, रामराज, पंधरी के गजेंद्र उर्फ भज्जू सिंह, जुग्गीलाल गुप्ता,पारा रैपुरा के बिहारीलाल प्रजापति, राकेश शर्मा,बिरखेरा के जयराम यादव, जितेंद्र सिंह, स्वतंत्र यादव, पचखुरा खुर्द के बब्बू सिंह, बाबू सिंह यादव आदि ने बताया कि नलकूपों को महज 10 घंटे विद्युत आपूर्ति दी जा रही है। उसमें भी लोकल फाल्ट आदि की समस्या आने पर आपूर्ति बाधित की जाती है। कुल मिलाकर 6 से 7 घंटे ही आपूर्ति मिल रही है। इससे धान की रोपाई समय पर नहीं हो पा रही है। जिससे किसान परेशान है।कहा कि बुंदेलखंड में ज्यादातर किसान बड़ी जोत के हैं। लिहाजा धान उत्पादन भी बड़े क्षेत्रफल में करते हैं। नलकूपों के अलावा सिंचाई का दूसरा विकल्प नहीं है। इससे किसान परेशान हैं। बड़ा क्षेत्रफल होने के कारण शासन प्रशासन को यहां की भौगोलिक स्थिति को मद्देनजर रखकर गांव की तरह कम से कम 18 घंटे आपूर्ति का प्रावधान करना चाहिए। विद्युत वितरण उपखंड के एसडीओ एमपी सिंह ने बताया कि शासन से नलकूपों को 10 घंटे आपूर्ति देने के आदेश हैं।जिसका पालन किया जा रहा है। इसके अलावा वह कुछ भी बदलाव करने में सक्षम नहीं है।
