ससुर के कहने पर दामाद ने की थी साली को हत्या,विरोधियों को फंसाने के लिए पिता ने रची थी साजिशप्रेमी की गवाही बनी सजा की वजह


नंदकिशोर यादव
भरुआ सुमेरपुर। गांव में अपने विरोधियों को अपहरण एवं हत्या में फंसाने के लिए सुभाष सिंह ने खुद दामाद के साथ मिलकर पुत्री की हत्या कराई थी और गांव के चार लोगों के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज करा दिया था। पुलिस की सघन विवेचना में एक पखवारे बाद हत्या का पर्दाफाश हुआ था। तब ससुर एवं दामाद को गिरफ्तार करके जेल भेजा गया था। तीन वर्षों के बाद दोनों जमानत पर जेल से बाहर आए थे। अब करीब 15 वर्ष बाद अदालत ने पिता को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दामाद की बीमारी के चलते मौत हो चुकी है।
टेढ़ा गांव निवासी सुभाष सिंह का परिवार गांव के सभ्रांत परिवारों में शुमार था। इनके पिता जगरूप सिंह स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। सुभाष सिंह के चार बेटियां थी। दो पुत्री की मौत हो चुकी है।इसने अपनी पुत्री विनीता सिंह का विवाह महोबा जिले के किसी गांव में किया था। दामाद भूपेंद्र सिंह छतरपुर मध्य प्रदेश में रहता था। विनीता सिंह के प्रसव होने पर बहनोई भूपेंद्र सिंह छोटी साली पिंकी सिंह को बहन की देखरेख के लिए छतरपुर ले गया। भूपेंद्र सिंह के घर छतरपुर निवासी रवि उर्फ रविंद्र प्रताप सिंह का आना-जाना था। पिंकी से रवि की दोस्ती हो गई। तीन माह बाद पिंकी टेढ़ा आ गई और फोन से रवि से बातचीत करने लगी। एक दिन सुभाष सिंह ने फोन पर बातचीत करने के दौरान पिंकी को पकड़ लिया और जमकर मारा पीटा। इससे नाराज होकर पिंकी 23 अक्टूबर 2010 को घर से गायब हो गई। इसको गांव निवासी कालका प्रसाद ने कस्बे के बस स्टैंड पर देखा। कालका से इसने फोन लेकर अपने प्रेमी रवि से बात कर छतरपुर आने की बात कही और महोबा जा रही बस में सवार हो गई। पिंकी के घर से गायब होने पर सुभाष सिंह ने गांव निवासी बृजेश उर्फ बाबू गुप्ता, दलपत गुप्ता, तत्कालीन प्रधान शिवमंगल सिंह,बालेंद्र सिंह के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज करा दिया। महोबा जाते समय जरिया एवं चिकासी थाने में तैनात पैरोकार भजनलाल एवं नन्दी बस में पिंकी को मिले। पिंकी ने इन दोनों के मोबाइल से रवि से कई बार फोन पर बात की और महोबा बुलाया। रवि पिंकी को महोबा से बाइक में लेकर छतरपुर पहुंचा और दो दिन अपने पास रखा। भूपेंद्र सिंह एवं रवि छतरपुर के एक गैराज में साथ कार्य करते थे। जब गैराज मालिक को किसी लड़की के रखे जाने की खबर मिली तो वह बेहद खफा हुए और तत्काल लड़की को हटाने के लिए बोला। तब रवि ने पिंकी को उसके बहनोई भूपेंद्र सिंह के हवाले कर दिया। भूपेंद्र सिंह छतरपुर से टेढ़ा आया और पिंकी के छतरपुर में होने की बात ससुर सुभाष सिंह को बताई। इस पर सुभाष सिंह ने ऑनर किलिंग की पटकथा तैयार की और दामाद को भरोसा दिलाया कि वह हत्या कर दे। वह अपने विरोधियों को फंसा देगा। इस पर दामाद ने तैयार हो गया और वापस जाकर पिंकी को गांव छोड़ने की बात कह कर छतरपुर से लाकर जलालपुर थानाक्षेत्र के ममना गांव के पास हत्या कर शव को अरहर के खेत में फेंक दिया और फरार हो गया। दो दिन बाद सुभाष सिंह ने जलालपुर पहुंचकर शव की शिनाख्त पुत्री पिंकी के रूप में की। पुलिस ने पूर्व में दर्ज अपहरण के मुकदमे में हत्या की धारा बढ़ाकर आरोपियों को गिरफ्तार करने की कोशिश की। इससे गांव में बवाल खड़ा हो गया और सैकड़ो ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन करके आरोपियों को निर्दोष बताकर निष्पक्ष जांच की मांग की। आरोपियों के परिजन तत्कालीन डीजीपी कर्मवीर सिंह से मिले और खुद को निर्दोष बताकर निष्पक्ष जांच की मांग की। डीजीपी ने तत्कालीन पुलिस अधीक्षक को बगैर जांच किए किसी को गिरफ्तार नहीं करने के आदेश दिए। तत्कालीन थानाध्यक्ष शरीफ खान ने गहनता से पड़ताल की और कालका प्रसाद के फोन नंबर से रवि तक जा पहुंचे। रवि ने पूरा घटनाक्रम बताया। तब पुलिस ने भूपेंद्र सिंह को दबोचा और कड़ाई से पूछताछ की। भूपेंद्र ने ससुर के कहने पर हत्या करने की बात स्वीकार की। पुलिस ने इसको आनर किलिंग का केस मानकर पिता सुभाष सिंह व दामाद भूपेंद्र सिंह को गिरफ्तार किया और रवि को सरकारी गवाह बनाकर घटना का पर्दाफाश 10 नवंबर 2010 को करके आरोपियों को जेल भेजा। साथ ही गांव के सभी आरोपियों को इस केश से मुक्त कर दिया। बाद में रवि की अदालत में हुई गवाही से सजा की राह प्रशस्त हुई। सुभाष सिंह को आजीवन कारावास सजा होने पर गांव में खुशी की लहर है।
ससुर के कहने पर दामाद ने की थी साली को हत्या
विरोधियों को फंसाने के लिए पिता ने रची थी साजिश
प्रेमी की गवाही बनी सजा की वजह

भरुआ सुमेरपुर। गांव में अपने विरोधियों को अपहरण एवं हत्या में फंसाने के लिए सुभाष सिंह ने खुद दामाद के साथ मिलकर पुत्री की हत्या कराई थी और गांव के चार लोगों के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज करा दिया था। पुलिस की सघन विवेचना में एक पखवारे बाद हत्या का पर्दाफाश हुआ था। तब ससुर एवं दामाद को गिरफ्तार करके जेल भेजा गया था। तीन वर्षों के बाद दोनों जमानत पर जेल से बाहर आए थे। अब करीब 15 वर्ष बाद अदालत ने पिता को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दामाद की बीमारी के चलते मौत हो चुकी है।
टेढ़ा गांव निवासी सुभाष सिंह का परिवार गांव के सभ्रांत परिवारों में शुमार था। इनके पिता जगरूप सिंह स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। सुभाष सिंह के चार बेटियां थी। दो पुत्री की मौत हो चुकी है।इसने अपनी पुत्री विनीता सिंह का विवाह महोबा जिले के किसी गांव में किया था। दामाद भूपेंद्र सिंह छतरपुर मध्य प्रदेश में रहता था। विनीता सिंह के प्रसव होने पर बहनोई भूपेंद्र सिंह छोटी साली पिंकी सिंह को बहन की देखरेख के लिए छतरपुर ले गया। भूपेंद्र सिंह के घर छतरपुर निवासी रवि उर्फ रविंद्र प्रताप सिंह का आना-जाना था। पिंकी से रवि की दोस्ती हो गई। तीन माह बाद पिंकी टेढ़ा आ गई और फोन से रवि से बातचीत करने लगी। एक दिन सुभाष सिंह ने फोन पर बातचीत करने के दौरान पिंकी को पकड़ लिया और जमकर मारा पीटा। इससे नाराज होकर पिंकी 23 अक्टूबर 2010 को घर से गायब हो गई। इसको गांव निवासी कालका प्रसाद ने कस्बे के बस स्टैंड पर देखा। कालका से इसने फोन लेकर अपने प्रेमी रवि से बात कर छतरपुर आने की बात कही और महोबा जा रही बस में सवार हो गई। पिंकी के घर से गायब होने पर सुभाष सिंह ने गांव निवासी बृजेश उर्फ बाबू गुप्ता, दलपत गुप्ता, तत्कालीन प्रधान शिवमंगल सिंह,बालेंद्र सिंह के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज करा दिया। महोबा जाते समय जरिया एवं चिकासी थाने में तैनात पैरोकार भजनलाल एवं नन्दी बस में पिंकी को मिले। पिंकी ने इन दोनों के मोबाइल से रवि से कई बार फोन पर बात की और महोबा बुलाया। रवि पिंकी को महोबा से बाइक में लेकर छतरपुर पहुंचा और दो दिन अपने पास रखा। भूपेंद्र सिंह एवं रवि छतरपुर के एक गैराज में साथ कार्य करते थे। जब गैराज मालिक को किसी लड़की के रखे जाने की खबर मिली तो वह बेहद खफा हुए और तत्काल लड़की को हटाने के लिए बोला। तब रवि ने पिंकी को उसके बहनोई भूपेंद्र सिंह के हवाले कर दिया। भूपेंद्र सिंह छतरपुर से टेढ़ा आया और पिंकी के छतरपुर में होने की बात ससुर सुभाष सिंह को बताई। इस पर सुभाष सिंह ने ऑनर किलिंग की पटकथा तैयार की और दामाद को भरोसा दिलाया कि वह हत्या कर दे। वह अपने विरोधियों को फंसा देगा। इस पर दामाद ने तैयार हो गया और वापस जाकर पिंकी को गांव छोड़ने की बात कह कर छतरपुर से लाकर जलालपुर थानाक्षेत्र के ममना गांव के पास हत्या कर शव को अरहर के खेत में फेंक दिया और फरार हो गया। दो दिन बाद सुभाष सिंह ने जलालपुर पहुंचकर शव की शिनाख्त पुत्री पिंकी के रूप में की। पुलिस ने पूर्व में दर्ज अपहरण के मुकदमे में हत्या की धारा बढ़ाकर आरोपियों को गिरफ्तार करने की कोशिश की। इससे गांव में बवाल खड़ा हो गया और सैकड़ो ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन करके आरोपियों को निर्दोष बताकर निष्पक्ष जांच की मांग की। आरोपियों के परिजन तत्कालीन डीजीपी कर्मवीर सिंह से मिले और खुद को निर्दोष बताकर निष्पक्ष जांच की मांग की। डीजीपी ने तत्कालीन पुलिस अधीक्षक को बगैर जांच किए किसी को गिरफ्तार नहीं करने के आदेश दिए। तत्कालीन थानाध्यक्ष शरीफ खान ने गहनता से पड़ताल की और कालका प्रसाद के फोन नंबर से रवि तक जा पहुंचे। रवि ने पूरा घटनाक्रम बताया। तब पुलिस ने भूपेंद्र सिंह को दबोचा और कड़ाई से पूछताछ की। भूपेंद्र ने ससुर के कहने पर हत्या करने की बात स्वीकार की। पुलिस ने इसको आनर किलिंग का केस मानकर पिता सुभाष सिंह व दामाद भूपेंद्र सिंह को गिरफ्तार किया और रवि को सरकारी गवाह बनाकर घटना का पर्दाफाश 10 नवंबर 2010 को करके आरोपियों को जेल भेजा। साथ ही गांव के सभी आरोपियों को इस केश से मुक्त कर दिया। बाद में रवि की अदालत में हुई गवाही से सजा की राह प्रशस्त हुई। सुभाष सिंह को आजीवन कारावास सजा होने पर गांव में खुशी की लहर है।

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