रियल मीडिया नेटवर्क
भरुआ सुमेरपुर। देशभक्तों के देश के प्रति योगदान के मद्देनजर वर्णिता संस्था के तत्वावधान में विमर्श विविधा के अन्तर्गत जिनका देश ऋणी है के तहत एक बेमिसाल क्रांतिकारी बटुकेश्वर दत्त की पुण्यतिथि पर संस्था के अध्यक्ष डा. भवानीदीन ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि बटुकेश्वर दत्त वास्तव में मातृभूमि के रखवाले थे। जिनके योगदान को देश हमेशा याद रखेगा। इनका बंगाल के बर्धमान जिले के अनौरी गांव में 18 नवम्बर 1910 को गोष्ठ बिहारी दत्त के घर जन्म हुआ था। कानपुर से अपनी शिक्षा समाप्त करने के बाद से ही ये राष्ट्रधर्मी हो गये। इनकी 1924 में कानपुर में भगतसिंह से भेंट हुई। इसके बाद दिल्ली की केन्द्रीय असेंबली में बम फेंकने की योजना बनी, जिसमें दत्त भी शामिल हुए। 8 अप्रैल 1929 को असेंबली में बम फेंककर यह और भगतसिंह भागे नहीं। बल्कि खुद को गिरफ्तार करवाया। जिसके बाद लाहौर षडयंत्र केस के नाम से मुकदमा चला और भगतसिंह, राजगुरु तथा सुखदेव को फांसी हुई। इन्हें आजीवन कारावास दिया गया। यह 1938 में जेल से छूटे। भारत छोड़ो आंदोलन में इन्हें फिर जेल हुई। फिर 1945 में छूटे। आजादी के लिए सब कुछ खपा देने वाले इस पुरोधा को आजाद भारत में बहुत ही कष्टमय जीवन जीना पड़ा। इलाज के लिए पैसे नहीं जुटा पाये। क्षय रोग से पीड़ित होने के बाद कालांतर में 20 जुलाई 1965 को इनका निधन हो गया। इस कार्यक्रम में सिद्धा, बाबूलाल, महावीर, रामनरायन, रिचा, विकास, सागर, प्रिन्स, दस्सी, राहुल आदि शामिल रहे।

