भरुआ सुमेरपुर। देशभक्तों की देश के प्रति भूमिका के मद्देनजर वर्णिता संस्था के तत्वावधान में विमर्श विविधा के तहत देश की आजादी के संघर्ष का एक बेमिसाल पुरोधा मदनलाल ढींगरा की पुण्यतिथि पर संस्था के अध्यक्ष डा. भवानीदीन ने श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि मदनलाल ढींगरा वास्तव में देश परायण सूरमा थे। इनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है। इनका जन्म पंजाब के खत्री परिवार में 1883 में डा. दित्ता मल के घर हुआ था। इन्होंने देश में प्रारम्भिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद इन्जीनियरिंग शिक्षा के लिये ब्रिटेन गये। वहां पर सावरकर द्वारा स्थापित इन्डिया हाउस से जुड़े। यह श्याम जी कृष्ण वर्मा जैसे देशभक्त से बहुत प्रभावित थे। भारत में वायसराय रहे कर्ज़न वायली से ढींगरा बहुत आक्रोशित थे क्योंकि यह क्रांतिकारियों को तुरंत फांसी पर लटका देता था। ढींगरा ने भारत एवं क्रांतिकारियों के विरोधी को मारने का प्रण लिया और ब्रिटेन में 1909 में जब कर्जन वायली जहांगीर हाल से भाषण देकर बाहर निकला तो उस पर पांच फायर कर उसे मौत की नींद सुला दिया। गोरों ने न्याय का नाटक कर ढींगरा को फांसी की सजा दी। ढींगरा को इंग्लैंड में 17 अगस्त 1909 को फांसी पर लटका दिया गया। इस तरह से लगभग मात्र 25 वर्ष की आयु में ढींगरा देश के लिये शहीद हो गए। इस कार्यक्रम में अशोक अवस्थी, सिद्धा, बाबूलाल, प्रेम, सागर, प्रिन्स, रामनरायन सोनकर, भोलू सिंह, रिचा, महावीर, वंसिका, दस्सी, राहुल प्रजापति आदि शामिल रहे।

