भरुआ सुमेरपुर। देशभक्तों की देश के प्रति भूमिका के मद्देनजर वर्णिता संस्था के तत्वावधान में विमर्श विविधा के अन्तर्गत जिनका देश ऋणी है के तहत क्रांति की जीवन्त मूर्ति के प्रतीक ज्योतीन्द्र नाथ मुखर्जी उर्फ बाघा जतीन की पुण्यतिथि पर संस्था के अध्यक्ष डा. भवानीदीन ने श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि बाघा जतीन वास्तव में देश के लिए समर्पित एक युवा क्रांतिकारी थे। जो मात्र 36 वर्ष की उम्र में देश के काम आ गये। उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है। जतीन का जन्म 7 दिसम्बर 1879 को बंगाल में उमेशचंद्र मुखर्जी और शरत शशि के घर हुआ था। इन्होंने इन्टर तक पढ़ाई करने के बाद नौकरी कर ली। शुरू से यह देश सेवी सोच के युवा थे। इन्होंने एक बार जंगल में शेर से भिडन्त होने पर उसे एक आध हथियार से मौत के घाट उतार दिया था। तब से इन्हें बाघा जतीन कहा जाने लगा। आजादी के संघर्ष को लेकर पुलिस से हुई मुठभेड़ में यह घायल हो गए थे। बाद में जेल में इनका निधन हो गया। इस कार्यक्रम में सिद्धा, बाबूलाल, प्रेम, सागर, रिचा, पंकज सिंह, रामनरायन सोनकर, विकास, कमलेश, दस्सी, राहुल प्रजापति आदि शामिल रहे।

