बुंदेलखंड बना देश का हीट चैम्बर,बांदा ने कायम किया वर्ल्ड रिकार्ड

बुंदेलखंड बना देश का हीट चैम्बर,बांदा ने कायम किया वर्ल्ड रिकार्ड

पीयूष त्रिपाठी
लखनऊ।बुंदेलखंड में यूपी के 7 जिले व एमपी के 6 जिले आते हैं। झांसी, जालौन, बांदा, महोबा, चित्रकूट, ललितपुर, हमीरपुर टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, दमोह, सागर, दतिया। यहां 47°C-49°C तापमान और लू ने इसे हीट चैंबर में तब्दील कर दिया है। भौगोलिक कारण यहां की पत्थर और पठार पथरीली जमीन है। बुंदेलखंड विंध्य पठार का हिस्सा है। यहां लाल-काली मिट्टी के नीचे ग्रेनाइट-बलुआ पत्थर है। पत्थर दिन में जल्दी गर्म हो जाता है और रात में देर तक गर्मी छोड़ता है। AC की तरह काम नहीं करता।पानी की कमी रहती हैक्योंकि बलुई-पथरीली जमीन पानी सोखती नहीं। बारिश का 90% पानी बह जाता है। भूजल स्तर 300-400 फीट नीचे। तालाब सूखे हैं। नमी न होने से गर्मी ज्यादा लगती है बंगाल की खाड़ी और अरब सागर दोनों से दूरहै। समुद्री हवाओं का ठंडा असर नहीं पहुंचता।मौसम का पैटर्न लू बेल्ट में आता है। लू बेल्ट में ही राजस्थान-पाकिस्तान के थार रेगिस्तान से गर्म-पछुआ हवाएं सीधे बुंदेलखंड आती हैं। बीच में कोई बड़ा पहाड़ या जंगल नहीं जो रोक दे। अप्रैल-जून में 40-50 किमी रफ्तार की गर्म हवाएं चलती हैं। समुद्र तल से 200-300 मीटर ऊंचा। ज्यादा ऊंचाई पर ठंडक होती है, पर यहां मैदानी-पठारी इलाका है। बुंदेलखंड में मानसून 25 जून के बाद आता है। राजस्थान की तरफ से पहले ही अप्रैल में गर्मी शुरू हो जाती है। मई-जून सबसे खराब।जंगल कटे, हरियाली खत्म है।पेड़ 2% से भी कम1950 में बुंदेलखंड में 30% जंगल था, अब 1.8% बचा है। पेड़ कटने से छाया खत्म हो गयी और जमीन सीधे तपती है। पेड़ नमी छोड़ते हैं, वो भी बंद। चंदेल राजाओं के 1000 साल पुराने तालाब सूख गए या कब्जा हो गए। 2005 में 2200 तालाब थे, अब 600 बचे। पानी की भाप से ठंडक नहीं मिलती।शहरों में सड़क-घर बढ़े। कंक्रीट-तारकोल दिन में 60°C तक गर्म होकर रात में गर्मी छोड़ता है। इसे “अर्बन हीट आइलैंड” कहते हैंI 1960 में बुंदेलखंड में साल में 5-6 दिन लू चलती थी। अब 2023-24 में 18-22 दिन चल रही है। पहले रात में 25°C हो जाता था, अब मई-जून में रात का तापमान भी 32-34°C रहता है। शरीर को आराम नहीं मिलता। 20 साल में औसत बारिश 20% घटी है। सूखा लगातार 4-5 साल रहता है। 2003-से 2010 तक लगातार सूखा पड़ा। केन-बेतवा जैसी नदियों पर बांध बने पर नहरें नहीं बनीं। पानी रुक गया पर खेत तक नहीं पहुंचा। नमी घटी। पत्थर-बालू का खनन धड़ल्ले से। पहाड़ कटने से इकोसिस्टम बिगड़ा। धूल बढ़ी तो गर्मी ज्यादा लगती है। पानी न होने से 40% खेत बंजर पडे हैं। खाली जमीन धूप में ज्यादा तपती है। हरे खेत 2-3°C ठंडे रखते हैं। बुंदेलखंड में मई में 45-48°C आम है। 2019 में बांदा में 49.2°C रिकॉर्ड हुआ। 2024 में यूपी में लू से 100 से ज्यादामौतें हुई। ज्यादातर बुंदेलखंड में। पत्थर हैं और पानी की कमी है, जंगल कट रहे। थार की हवा ये सब मिलकर बुंदेलखंड को भारत का “हीट चैंबर” बना रहे हैं । सरकार ने “बुंदेलखंड पैकेज” दिया, केन-बेतवा लिंक शुरू है मगर असर दिखने में 10 साललगेंगे। बांदा का तापमान इन दिनों दुनिया में सबसे ज्यादा में से एक है। कई दिन “विश्व का सबसे गर्म शहर” भी रहा। 48.2°C रिकॉर्ड के साथ 20 मई 2026 को बांदा 48.2°C के साथ लगातार तीसरे दिन भारत का सबसे गर्म शहर रहा। ये बांदा का नया ऑल-टाइम रिकॉर्ड है। 27 अप्रैल 2026 को बांदा 47.6°C के साथ दुनिया के 8,212 मौसम स्टेशनों में सबसे गर्म था। लखनऊ Met विभाग ने इसकी पुष्टि की। अप्रैल 16 से बांदा देश में सबसे गर्म चल रहा है। 18 मई को भी 47.6°C के साथ भारत में नंबर-1 था।दुनिया से तुलना में 27 अप्रैल 2022: बांदा 47.6°C – विश्व में नं1। पाकिस्तान का नवाबशाह 47.5°C के साथ नं 2 था।18 मई 2026 फिर 47.6°C – भारत में नं 1। 46.4°C के साथ बांदा एशिया का सबसे गर्म स्थान रहा। ग्लोबली टाॅप 5 पर था – लीबिया के शहरों के बाद। 27 अप्रैल को भी दुनिया के 50 सबसे गर्म शहरों में से 50 के 50 भारत में थे। एक भी मिडिल ईस्ट, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया से नहीं। बांदा लिस्ट में नं 1 था।

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