
कानपुर।आर्य महासम्मेलन मे बोलते हुए हिमाचल प्रदेश से आए विद्वान संत आचार्य आर्य नरेश ने कहा कि महिलाओं को वेद/गायत्री मंत्र पढने का अधिकार नही था।यह अधिकार महर्षि स्वामी दयानंद सरस्वती ने दिलाया।आज भी कई महंत कहते है कि महिलाओं को वेद मंत्र नही पढना चाहिए।वे सब कुंठित मानसिकता से ग्रसित है।
लाजपत भवन में रविवार को आर्य समाज स्थापना के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर जिला आर्य प्रतिनिधि सभा कानपुर द्वारा आयोजित आर्य महासम्मेलन मे आर्य वीर दल एवं आर्य वीरांगना दल की बालिकाओं ने दण्ड व तलवार बाजी का अद्भुत साहसिक प्रदर्शन कर जमकर तालियां बटोरी।दण्ड का पिरामिड बनाकर जब एक सेविका ने ऊपर खडे होकर ओम का ध्वज फहराया तो पूरा हाल भारत माता की जय के उद्घोष से गूंज उठा।आचार्य आर्य नरेश ने कहा कि देश की आजादी का सबसे पहले उद्घोष स्वामी दयानंद जी ने किया।उन्होंने कहा कि हमें गलत पढाया गया कि आर्य बाहर से आए जबकि आर्यों का सारे विश्व में राज था।दयानंद ने भारत के अंदर गौशालाओं की स्थापना की।गुरुकुल स्थापित करवाए।छूआछूत की समाप्ति करवाई।कन्या विधालय बनवाए।ऋषि दयानंद पूरे विश्व को सनातन धर्म के नीचे लाना चाहते थे।उन्होंने कहा कि आजादी गांधी जी के चरखे से नही मिली।सरदार भगत सिंह, रामप्रसाद बिस्मिल, लाला लाजपतराय के अदम्य साहस से आजादी मिली।भारत विश्व की माता है।गौरी सरकार धोती से झुकती थी क्योंकि आर्य समाजी धोती पहनते थे।उन्होंने सफलता के पांच सूत्र बताते हुए कहा कि ओम का ध्यान, गौभक्त संस्कारी संतान,यज्ञ का अनुष्ठान, वेद का ज्ञान ,व राष्ट्र हित के लिए बलिदान करने से ही हम सफल होंगे।नारी शिक्षा एवं विधवा विवाह के लिए तथा छूआछूत जातिवाद, अंधविश्वास जैसी कुप्रथाओं को दूर करने के लिए आर्य समाज ने बडा संघर्ष किया।
प्रो.डा.ज्वलंत कुमार शास्त्री ने कहा कि सनातन धर्म का मूल वेद है।इसलिए स्वामी दयानंद का उद्घोष था वेदों की और लौटो।वेद का प्रसार ही आर्य समाज का मुख्य उद्देश्य है।वेदों से विमुखता ही सारे अधर्मो का मूल है।आर्य वीर दल के प्रदेश संचालक पंकज शर्मा ने कहा कि आर्य वीर दल आर्य संस्कृति की रक्षा के लिए संकल्पबद्ध है।कोलकाता से पधारे कैलाश कर्मठ ने भजनों की शानदार प्रस्तुति कर सबको भक्ति सागर में डूबो दिया।सम्मेलन में समाज के प्रतिष्ठित लोगों को प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
इसके पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ यज्ञ से किया गया।वेदरत्न डा.श्रुतकीर्ति आर्य ने वेदमंत्रों द्वारा यज्ञ संपन्न कराया।कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रधान चंद्रकांता गेरा ने की।संचालन मंत्री आनंद जी आर्य ने किया।
प्रमुख रूप से अशोक आनंद, सुभाष आर्य, प्रकाश वीर आर्य, सुरेन्द्र कुमार गेरा, हरिश चंद्र कनोत्रा,अनिल चोपड़ा, सरला चौधरी, रोमा चौधरी, उदयवीर सिंह विवेक आर्य आदि रहे।
