लखनऊ। बाराबंकी शहर के रेलवे स्टेशन पर चलती ट्रेन में चढ़ने के दौरान युवक का पैर फिसल गया और वह ट्रेन के पहियों की चपेट में आ गया। उसे बचाने की कोशिश में उसकी पत्नी भी ट्रेन से नीचे गिर गई। हादसे में युवक की मौत हो गई जबकि उसकी पत्नी को चिंताजनक हालत में केजीएमयू रेफर किया गया है। घटना में दंपति के तीन मासूम बच्चे बच गए। वह स्टेशन पर बिलखते रहे, जिन्हें रेलवे सुरक्षा बल ने अपने संरक्षण में लिया। जीआरपी थाना प्रभारी के अनुसार, आजमगढ़ जिले के लाटघाट क्षेत्र के मुहम्मदपुर गांव निवासी मनोज कुमार (35) और उनकी पत्नी वंदना (34) लखनऊ के गोमतीनगर में रहकर काम करते हैं। दोनों अपने तीन बच्चों के साथ आजमगढ़ जाने के लिए बाराबंकी रेलवे स्टेशन पहुंचे थे। रात करीब नौ बजे उत्सर्ग एक्सप्रेस प्लेटफॉर्म नंबर दो पर पहुंची। भीड़ अधिक होने के कारण वंदना पांच साल की बेटी हिमांशी, चार साल की मीठी व ढाई माह के दुधमुंहे बच्चे को लेकर लेकर पहले ट्रेन में चढ़ गईं। इसी दौरान मनोज ट्रेन में चढ़ने का प्रयास कर रहे थे। उनकी पीठ पर भारी बैग था। तभी ट्रेन चल पड़ी और संतुलन बिगड़ने से उनका पैर फिसल गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मनोज काफी दूर तक ट्रेन का हैंडल पकड़कर घिसटते रहे। पति को संकट में देख वंदना ने गोद से बच्चे को ट्रेन में एक यात्री के हवाले कर दरवाजे से उनका हाथ पकड़कर ऊपर खींचने की कोशिश की, लेकिन संतुलन बिगड़ने से वह भी नीचे गिर गईं। दोनों कुछ दूरी तक ट्रेन के साथ घिसटते चले गए। शोर-शराबा सुनकर लोको पायलट ने ट्रेन रोक दी। सूचना पर पहुंची रेलवे सुरक्षा बल और अन्य रेलकर्मियों ने तत्काल दोनों को बाहर निकाला। साथ ही ट्रेन में मौजूद तीनों बच्चों को सुरक्षित नीचे उतारा गया। गंभीर रूप से घायल दंपति को जिला अस्पताल भेजा गया, जहां चिकित्सकों ने मनोज कुमार को मृत घोषित कर दिया। वंदना की हालत अत्यंत गंभीर होने पर उन्हें उपचार के लिए लखनऊ के केजीएमयू रेफर कर दिया गया। घटना से सभी अवाक रह गए। बाराबंकी रेलवे स्टेशन, रात 9:30 बजे…आरपीएफ पोस्ट के बाहर पांच साल की हिमांशी अपनी ढाई माह की बहन को गोद में लिए बार-बार एक ही सवाल पूछ रही थी ….मम्मी-पापा कब आएंगे…? उसे नहीं पता था कि कुछ ही मिनट पहले उसके सामने उसकी दुनिया बिखर चुकी है। पास ही चार साल की मीठी रोते-रोते इतनी थक गई कि आरपीएफ पोस्ट के फर्श पर ही सो गई। ढाई माह की मासूम बच्ची बुखार से तप रही थी और लगातार रो रही थी। उसे चुप कराने के लिए एक महिला पुलिसकर्मी उसे गोद में लेकर दुलार रही थी। वह कभी बच्चे को संभालती तो कभी हिमांशी को समझाने की कोशिश करती, लेकिन मासूम बच्ची की नजरें बार-बार स्टेशन की तरफ उठ जाती थीं। आरपीएफ पोस्ट पर मौजूद हर शख्स की आंखें नम थीं। बच्चों की बेबसी देखकर पुलिसकर्मी भी भावुक हो उठे। संवाद न्यूज एजेंसी के प्रतिनिधि ने बच्चों की हालत की जानकारी सीएमओ डॉ. रंजन गौतम को दी। बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण और जरूरी चिकित्सकीय सहायता की व्यवस्था के निर्देश दिए गए। रात गहराती जा रही थी, लेकिन हिमांशी का इंतजार खत्म नहीं हो रहा था। वह बार-बार कह रही थी.. मेरी मम्मी-पापा को बुला दो…।
ट्रेन में चढ़ते समय दंपति फिसले, पति की मौत, पत्नी गंभीर, बेसहारा हुईं ढाई माह, तीन व पांच साल की बेटियां
