पत्रकारिता के पुरोधा और गरीबों के मसीहा थे रमाकांत पांडेय

पत्रकारिता के पुरोधा और गरीबों के मसीहा थे रमाकांत पांडेय

जन्म 12 जुलाई पर पेज 3 न्यूज/रियल मीडिया न्यूज नेटवर्क की ओर से विशेष अभिनंदन
पीयूष त्रिपाठी

कानपुर। लाखों लोग जब अपने निवास स्थान के कालम में लिखते है या बताते हैं- यशोदा नगर कानपुर उ0प्र0। तब शायद ही किसी के दिमाग में सवाल आता होगा कि ‘‘यशोदानगर नगर’’ नाम कैसे पड़ा? कौन थी ‘‘यशोदा’’। किसने कब बसाया यशोदा नगर? आखिर कोई न कोई तो होगा यशोदा नगर नाम रखने वाला? यह सवाल लंबे समय के बाद आम तौर पर कम उठता है। जिज्ञासा शांत हो जाती है। नाम के पीछे का रहस्य या घटनाक्रम जानने की न कोई जरूरत रहती है न ही इच्छा कि कौन कौन से नगर गांव का जो भी नाम है क्यों- कैसे कब पड़ा? किसने नीव रखी? हुआ क्या था? ये सब सवाल व्यर्थ हो जाता हैं। मगर 1969 जुलाई में जब एक नए बसने जा रहे नगर की परिकल्पना हुई, योजना क्रियान्वित हुई, काम चालू हुआ तो इस नगर को बसाने जा रही टीम के लीडर ने कहा कि आप सबने इस नए बसने जा रहे नगर का नाम कुछ तो सोचा होगा? वह कुल आठ लोग थे- सभी ने कहा कि अभी तो नहीं सोचा- आप ही बताइए, अगर कुछ सोचा हो तो। टीम लीडर ने कहा कि मेरी मां का नाम है यशोदा देवी। आप लोग चाहें तो यशोदा नगर नाम रख लिया जाय। सभी लोगों ने तालियां बजाई और खुशी-खुशी मंजूरी दे दी और सर्वसम्मति से नाम फाइनल हो गया- यशोदा नगर। नगर बसाया जाने लगा। जिनकी मां यशोदा देवी के नाम पर यशोदा नगर बसना शुरू हुआ उन शख्स का नाम था रमाकांत पाण्डेय। अद्भुत प्रतिभा, गजब इंटेलीजेंट, बहुमुखी व्यक्तित्व, हाजिर जवाब, तर्कशील बातचीत। इंसानियत के गुणों, दया, स्नेह, सहयोग का जज्.बा, गरीबों असहायों, निर्बलों के प्रति खास संवेदना से भरपूर होने के साथ गौरवर्ण, कद्दावर, सुदर्शन व्यक्तित्व के धनी। जहां भी मौजूद हों वहीं आकर्षण के केन्द्र। विद्वान- दार्शनिक विचारक और जीवन जाने की कला के ज्ञान से भरपूर थे रमाकांत पांडेय। फतेहपुर जिले के अमौली ब्लाक में स्थित ग्राम बुढ़वां निवासी शिव कुमार पांडेय व धर्म पत्नी यशोदा देवी के दो पुत्र हुए बड़े लक्ष्मीकांत पांडेय, छोटे रमाकांत पांडेय। शिव कुमार पांडेय की रूचि संस्कृत अध्ययन व पांडित्य कर्म में थी। गरीबी का आलम था मगर जीवन चर्या पूर्णरूप से वैदिक थी। शांत, सहिष्णु, ईश्वर भक्ति, समाज में सम्मान था। रमाकांत पांडेय कानपुर आ गए। डीएवी कालेज में पढ़ने लगे। ट्यूशन पढ़ाकर खर्चा चलाते थे। अद्भुत बात ये थी कि कभी कभी खुद एम.ए. कर रहे थे और दूसरे एम.ए. के छात्र को ट्यूशन पढ़ा लेते थे। इधर यशोदा नगर बसता रहा उधर लेखन प्रतिभा के धनी रमाकांत पांडेय ने अखबार निकाला जिसका नाम था रमता योगी। बाद में जो लोक भारती बन गया और अभी चल रहा है। अखबार धीरे-धीरे लोकप्रिय होने लगा और उसमें रमाकांत पांडेय द्वारा लिखे गये लेख और उनके निर्देशन में अखबार का कंटेंट पसंद किया जाने लगा। लोक भारती अखबार धीरे-धीरे एक प्रयोगशाला के साथ पत्रकारिता की प्रारम्भिक पाठशाला बनने लगा। नवयुवक आते रहे और यहां से सीख करके जाते रहे दर्जनों पत्रकार अभी भी ऐसे मिल जायेगे जिन्होंने पत्रकारिता रमाकांत पांडेय के निर्देशन में लोक भारती से सीखी। मैंने स्वयं यहीं रह कर पत्रकारिता की हर विधा सीखी। किसी भी लेखन का सबसे बड़ा कमाल यहीं होता है कि लिखी हुई बात पढ़ने वाले की समझ में आ जाए और घटना क्रम का भूत भविष्य की भी व्याख्या हो जाए, रमाकांत पांडेय के लेखन में यह कमाल बड़ी ही खूबसूरती के साथ मिलता था नमूने के तौर पर उन्होंने सवाल किया कि मंदिर जरूरी या शौचालय। जवाब था दोनों। लेकिन उन्होंने लिखा था कि इस देश में शौचलयों की ज़रूरत है और आगे चल कर देखना कि यह काम व्यक्ति के बजाए सरकारे किया करेंगी। आज यह बात सही साबित होती है। इसी तरह जब अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में सेना ने कार्रवाई की थी उसी दिन उन्होंने आगाह किया था कि अब श्रीमती इंदिरा गांधी को बहुत बड़ा जान का खतरा हो गया है उनकी बात सही साबित हुई। ऐसी एक नहीं हज़ारों घटनाएं हैं जिनका पत्रकारिता के दौरान उन्होंने भविष्यवाणी की और समय आने पर वह अक्षरशा सही साबित हुई। यही गुण उन्हें पत्रकारिता का पुरोधा बनाता था। आज दर्जनों लोग नामवर पत्रकार हैं रमाकांत पांडेय के बदौलत। आज सैकड़ों लोग मकान मालिक हैं रमाकांत पांडेय की बदौलत। आज तमाम लोग कमा खा रहे हैं रमाकांत पांडेय की बदौलत। आज तमाम लोगों के परिवार सरसब्ज़ हैं रमाकांत पांडेय के बदौलत। मुझे व्यक्तिगत अफसोस है कि उन्हें याद करने और उन्हें याद रखने वालों की संख्या कम हुई है। यह एहसान फरामोशी भी है और बदलते ज़माने का असर भी है जो भी हो दुनिया चलती रहती है लेकिन मेरा मानना है कि उनके जैसा व्यक्तित्व मुझे तो दूसरा नहीं मिला। आज रमाकांत पांडेय के जन्म दिन पर पुण्य स्मरण और उनके द्वारा किये गये मेरे अपने जीवन में कार्यों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापन। उनके जन्म दिन पर लोक भारती परिवार द्वारा मुफ्त नेत्र परीक्षण शिविर लगवाया जा रहा है जो कि उनकी धारणा कि लोगों के लिए जो कुछ भी अच्छा किया जा सके करना चाहिए का परिपालन है। उनके पुत्र अनाम पांडेय पुत्रवधू संगीता पांडेय, पौत्र चर्चित पांडेय, पौत्रिया पूर्वी व श्रेया के साथ सभी परिजनों तथा लोक भारती परिवार इसके लिए बधाई का पात्र है।

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