1,125 पत्नियां और 1,375 पति स्पाउजल हत्या के शिकार हुए
पीयूष त्रिपाठी
लखनऊ। सिद्धार्थनगर के डुमरियागंज थाना इलाके के चक मझारी गांव में एक दिल दहलाने वाली घटना सामने आई। करीब डेढ़ महीने पहले ही प्रेम विवाह करने वाले एक युवक ने पत्नी की हत्याकर शव को घर में दफना दिया और ऊपर से चारपाई डालकर सोता रहा। हत्या के आरोप से बचने के लिए उसने पत्नी की गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखा दी। मृतका की मां की तहरीर पर पुलिस ने जब उसके घर की जांच की तब सच्चाई सामने आई। इसके बाद से ही आरोपी पति और परिवार के सदस्य लापता हैं। इसी तरह इटावा जिले मे मार्च में आपत्तिजनक अवस्था में पकड़े जाने के बाद पत्नी ने प्रेमी के साथ मिलकर खौफनाक साजिश रची। पहले पति को दूध में नींद की गोलियां मिलाकर बेहोश किया फिर प्रेमी के साथ मिलकर अंगोछे से गला कसकर मौत के घाट उतार दिया। इसके बाद हत्या को आत्महत्या दिखाने के लिए शव को पंखे पर टांग दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला घोंटकर हत्या की पुष्टि के बाद मामला खुला। फिलहाल दोनों पुलिस की गिरफ्त में हैं। यह वाकया है सिविल लाइन थाना क्षेत्र के तोड़ा गांव का। एक अन्य घटना में पीलीभीत के जिला अस्पताल के सीटी स्कैन कक्ष में एक पैरामेडिकल छात्र ने अपनी सहपाठी पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल छात्रा कशिश पटेल (20) को बरेली के एक निजी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया जहां उसकी मौत हो गई। कशिश को बचाने आई स्टाफ नर्स निधि पर भी आरोपी सागर सिंह ने हमला कर दिया। हाथ में चाकू लगने से वह घायल हो गईं। पुलिस अधीक्षक सुकीर्ति माधव ने बताया कि कानपुर के रहने वाले आरोपी सागर सिंह को हिरासत में ले लिया गया है और उससे पूछताछ की जा रही है। शाहजहांपुर के खुटार थाना क्षेत्र में गांव महोलिया वीरान निवासी 60 वर्षीय हरिपाल ने मंगलवार शाम अपनी पत्नी लक्ष्मी (58 वर्ष) की तमंचे से गोली मारकर हत्या कर दी। दंपती आपसी मनमुटाव के कारण अपने दो पुत्रों के साथ अलग-अलग रहते थे। आरोपी ने खुद को भी गोली मारने का प्रयास किया। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में ले लिया है। हरिपाल के चार पुत्र नरोत्तम, जंगबहादुर, पप्पू और नन्हें हैं। दो पुत्रियों रामगुनी और रामदेवी की शादी हो चुकी है। हरिपाल का पत्नी लक्ष्मी देवी से काफी समय से मनमुटाव चल रहा था। इस कारण हरिपाल बड़े पुत्र नरोत्तम के पास और लक्ष्मी देवी मंझले पुत्र जंगबहादुर के पास रहती थीं। पप्पू और नन्हें अलग रहते हैं। हरिपाल पत्नी से इस बात से काफी नाराज था कि वह जंगबहादुर का पक्ष लेती हैं। यह तीन घटनाओं के नमूने मात्र 36 घंटे के अंदर के हैं। इनसे अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि घर के अंदर भरोसा अक्सर सबसे बड़ा दुश्मन बन जाता है। पूरा का पूरा समाज इस स्पाउसल मर्डर की चपेट में है। न वैज्ञानिक समझ पा रहे हैं न मनोवैज्ञानिक न समाजशास्त्री की आखिर भारतीय समाज को क्या हो गया है कि खून के रिश्ते ही खूनी हो गये हैं, ऐसी भयावह और दिल दहला देने वाली घटनाएं सामने आ रही हैं जिससे अविश्वास और घबराहट का आलम हो गया है। एनसीआरबी और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उत्तर प्रदेश में हर साल घरेलू झगड़े, दहेज, अवैध संबंध और आपसी विवाद जानलेवा हो जा रहे हैं। एक साल के राष्ट्रीय स्तर के आंकड़े में है यूपी सबसे ऊपर। एनसीआरबी 2022 के डेटा और 2020-2024 की 5 राज्यों की रिपोर्ट के आधार पर। पत्नियों की हत्या पति ने कीः 2022 में पूरे देश में 270 पत्नियां पति द्वारा मारी गईं। 2017-2022 के बीच दहेज से जुड़ी हत्या अकेले 6,100 रहीं, यानी औसतन 1,000 से ज्यादा प्रति साल। कुल मिलाकर हर साल 6,000 से 7,000 महिलाएं पति/ससुराल वालों द्वारा मारी जाती हैं। पतियों की हत्या पत्नी ने की। 2022 में पूरे देश में 220 पति पत्नी द्वारा मारे गए। पिछले 5 साल में 5 राज्यों में 785 पति पत्नी द्वारा मारे गए। 2020-2024 के बीच सिर्फ 5 राज्यों में हुए 785 पतियों की हत्या में यूपी में 263 केस दर्ज हुए – सबसे ज्यादा। सालवारः 2020-45, 2021-52, 2022-60, 2023-56, 2024-50। घरेलू हिंसा के कुल केस एनसीआरबी 2023 के अनुसार यूपी में महिलाओं के खिलाफ अपराध में ‘पति या रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता’ सबसे बड़ा कारण है – कुल केस का 34 प्रतिशत। 2025 के अनुमान में यूपी में 45,000 घरेलू हिंसा के केस होने का अनुमान है जो कि देश में नंबर 1 है। एनसीआरबी ‘भाई द्वारा भाई की हत्या’ को अलग से नहीं गिनता। इसे ‘पारिवारिक विवाद/दुश्मनी’ के तहत मर्डर में जोड़ा जाता है। 2022 में भारत में कुल 28,522 मर्डर हुए थे, जिनमें से 2,821 केस प्रेम प्रसंग, बेवफाई, वैवाहिक विवाद से जुड़े थे। यूपी में जमीन, संपत्ति और पुरानी रंजिश के कारण भाई-भाई की हत्या के केस हर जिले से आते हैं, लेकिन अलग आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। विशेषज्ञ कहते हैं कि एनसीआरबी डेटा 2018-2023 बताता है कि वैवाहिक हिंसा में ‘घातक समरूपता’ है। 5 साल में अनुमानित 1,125 पत्नियां और 1,375 पति स्पाउजल हत्या के शिकार हुए। एक्सपर्ट्स का कहना है कि रिपोर्टेड केस ‘बर्फ का टुकड़ा’ मात्र हैं। सामाजिक कलंक, पुलिस पर भरोसा न होना और ‘ये घर का मामला है’ सोच से कई केस दब जाते हैं। ये आंकड़े एनसीआरबी और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित हैं। असली संख्या इससे ज्यादा हो सकती है क्योंकि कई केस दर्ज ही नहीं होते।
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