जंतर-मंतर से मिला नया संकेत, संविधान नहीं जो मैं बोलूं वही सही!

जंतर-मंतर से मिला नया संकेत, संविधान नहीं जो मैं बोलूं वही सही!

विद्यासागर त्रिपाठी
कांग्रेस द्वारा सत्यापित नाथूराम गोडसे संघ कार्यकर्ता ने एक मानव महत्मा गांधी जी की हत्या की। जिसे लेकर कांग्रेस सदैव संघ को इसका दोषी करार करती रहती है। जबकि संघ के कार्यकर्ता स्वतंत्र भारत में सदैव किसी भी आपदा में राष्ट्रहित खड़ा दिखाई देता है चाहे वो सैन्य सहायता ही हो य प्राकृतिक करोना जैसी आपदा अथवा रेल दुर्घटनाओं और भूकम्प जैसी आपदाओं में उनकी भूमिका रही हों। दूसरी ओर जवाहर लाल नेहरू और मो. अली जिन्ना की नीतियों के कारण स्वतंत्रता के बाद 1947 में लगभग 40 लाख हिन्दुओं की बर्बर हत्याएं हुईं,बलात्कार हुए,एवं लाखों हिन्दू बेघर भी हुए। पाकिस्तान में रह गए हिन्दू य तो धर्म बदल कर मुस्लिम धर्म अपना चुके हैं य वो वहां आज भी नरकीय जीवन भोग रहे हैं। 07 नवम्बर 1966 गौ भक्तों का सांस्कृतिक दिन गोपाष्टमी था और स्थान दिल्ली का संसद भवन परिसर जहां संत सिरोमणी करपात्री जी महराज हजारों साधु संतो के साथ हाथ में माला और कमंडल लेकर वो गौ हत्या पर प्रतिबंध की मांग लेकर वहां गये थे। लेकिन तब की इंदिरा गांधी सरकार ने उनसे वार्ता नहीं की,सीधे सीधे गोलियां चलवाकर सैकड़ो संत महत्माओ और गौ हत्याएं करवाई थीं। 18 से 20 मार्च 1974 बिहार के छात्र शिक्षा का अधिकार मांग रहे थे, आन्दोलनकारी छात्रों से कांग्रेस सरकार ने कोई वार्ता नहीं सीधे सीधे छात्रों को देखते ही गोली मारने के आदेश दिये थे और उस आन्दोलन में सरकारी आंकड़ों में 30 युवा छात्रों की निर्मम हत्याओं के साथ में सैकड़ों छात्र घायल हुए थे। 12 जनवरी 1998 मध्यप्रदेश जहां पर किसान ओलावृष्टि से आई आपदा में मुआवजा मांगने आये थे,लेकिन मुआवजा तो नहीं मिला मिली थीं छाती में सीधे गोलियां जिसमें सरकारी आंकड़ों में 22 किसानों की हत्याएं हुई थीं। 1984 श्रीमती इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव गांधी सरकार के नेतृत्व में लगभग 17 हजार निर्दाेष सिक्खों की निर्ममता पूर्वक क्रूरतम हत्याएं हुईं,संपत्ति लूटी गई वो अलग। 30 अक्टूबर 1990 अयोध्या में निहत्थे श्री रामभक्त कारसेवकों पर सीधे सीधे गोलियां चलवाकर सैकड़ो जघन्य हत्याएं कराई गई। 26 नवम्बर 2008आतंकवादी अब्दुल कसाब साथियों सहित पाकिस्तान से भारत में आया और सरकारी आंकड़ों के हिसाब से 167 निर्दाेष नागरिकों व सुरक्षा कर्मियों को निर्ममता से मार डालता है। 1990 के दसक में जम्मू-कश्मीर में भी हजारों हिन्दुओं की नृशंस हत्याएं हुईं बलात्कार हुए और लगभग सम्पूर्ण हिन्दू समाज कश्मीर से बेघर कर दिया गया। स्वतंत्रता के बाद भारत में जब कांग्रेस की उपरोक्त समय में अधिकांशतः सरकारें रहीं तब उन्हें उपरोक्त घटनाओं में कोई आतंकवादी नहीं मिला। उन्हें सिर्फ नाथूराम गोडसे के साथ साथ संघ परिवार में ही आतंकवादी व अलगाववादी दिखाई देते रहे। जिनकी नजर में आज तक भी नाथूराम गोडसे आतंकवादी हैं व संघ का विचार परिवार अलगाववादी है, तो यकीन मानिए कि वो लोग संघ की विचारधारा के बढ़ते प्रभार से मानसिक रोगी हो चुके हैं और अब वही लोग संघ फोबिया से ग्रसित होकर सीधे सीधे राष्ट्र द्रोह जैसी असंवैधानिक गतिविधियों पर उतर आए हैं। जिनकी एक एक गतिविधि पर अब देश के राष्ट्रवादी नागरिक को पैनी नजर रखनी चाहिए। जो पार्टी जार्ज सोरोस के उस संगठन में पदाधिकरी/उपाध्यक्ष है जो विदेशी संगठन जम्मू-कश्मीर को भारत का अंग नहीं मानता। वो कैसे राष्ट्रवादी हैं ? विचार करें। जो लोग ष्मैं नहीं राष्ट्र पहले,,की भावना लेकर इस विचारधारा को अंगीकार करके आगे बढ़ रहे हैं हम सब सनातनियों को उनके साथ खड़ा होना होगा। अन्यथा की स्थितियों में कुछ राष्ट्रद्रोही लोग भारत को नेपाल,बांगलादेश एवं म्यांमार और श्रीलंका जैसी स्थितियां बनाने के लिए आतुर हैं, उनकी विचारधारा में भारतीय सेनाएं अर्धसैनिक बलों के साथ साथ पुलिसबल सिर्फ तमाशबीन होकर देखने भर के लिए बने हैं यदि कोई कहीं अराजकता करे सुरक्षा बलों को मारे पीटे य राष्ट्रीय सम्पत्ति को क्षति पहुंचाये तो भी वो उन्हें रोके नहीं उनको संरक्षण दे। जैसा कि वर्तमान नीट परीक्षा पेपर लीक के मामले में जंतर मंतर पर तथाकथित छात्र आंदोलन में हुए घटनाक्रम में देखा जा रहा है। सुरक्षा बलों के साथ हमला मारपीट कर गम्भीर रूप से घायल कर देने के घटनाक्रम पर बात कोई नहीं करता, बल्कि सुरक्षा बलों पर लाठी चार्ज पानी बौछार आंसू गैस के गोले छोड़ने पर कठोर कार्यवाही करने की मांग लोग कर रहे हैं। ऐसा लगता है कि जैसे सुरक्षाबल हमारे देश के नागरिक नहीं हैं और न ही उन्हें कोई कानूनी अधिकार प्राप्त है! उन्हें सिर्फ मार खाने के लिए ही वहां तैनात किया जाता है। अब भविष्य में कोई शान्तिपूर्ण आन्दोलन करने की अनुमति लेगा और फिर वो वहां अराजकता करेगा राष्ट्रीय सम्पत्ति को क्षति पहुंचायेगा और वहां मौजूद सुरक्षाबल खड़े खड़े सारा तमाशा देखते रहेंगे और यदि वो ऐसा नहीं करेंगे तो उन्हें संघ के कार्यकर्ता य मनुवादी कह कर आरोपित किया जायेगा।

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