बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे निर्माण की लापरवाही से दो जनपदों के दो दर्जन गांवों का जीना मुहाल, PWD ने पहले ही जताई थी आपत्ति
कृष्ण कुमार द्विवेदी
महोबा/गहरौली। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के निर्माण के दौरान हुई लापरवाही महोबा और हमीरपुर जनपद के अंतिम छोर में बसे ग्रामीणों के लिए बड़ी मुसीबत बन गई है। एक्सप्रेसवे बनने के बाद से कई किसानों के खेतों की जल निकासी ही बंद हो गई है, लेकिन सबसे गंभीर समस्या गहरौली-खरेला मार्ग पर बनी हुई है।
जनपद महोबा के अंतिम छोर में खरेला से गहरौली (हमीरपुर) को जोड़ने वाली PWD की 9 किलोमीटर सड़क पर ग्राम पुन्निया के पास करीब 300 मीटर हिस्से में पूरे तीन महीने पानी भरा रहता है। यह समस्या सिर्फ बरसात के तीन महीने की नहीं है, बल्कि जब भी किसी सीजन में तेज बारिश होती है यही संकट खड़ा हो जाता है।एक लाख की आबादी प्रभावित*
इस जलभराव से पुन्निया, गहरौली, न्यूरिया, इमलिया हुसैना, तगारी, अलरा, गोरा पहाड़ी सहित करीब 30 गांवों की लगभग एक लाख की आबादी बुरी तरह प्रभावित है। ढाई किलोमीटर में ही 70 से 80 गड्ढे हैं, पूरी सड़क गड्ढों में तब्दील है।
3 फुट लेवल ऊंचा करने से बनी तालाब, तभी हुई थी नोकझोंक*
ग्रामीणों के मुताबिक पुन्निया में कोयले की भट्टी के पास पहले से ही सड़क नीची थी। पांच वर्ष पूर्व बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे निर्माण के दौरान PWD सड़क से करीब 3 फुट लेवल ऊंचा कर अपर क्रॉसिंग बना दी गई। निर्माण के दौरान ही महोबा लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने यूपीडा की कार्यदायी संस्था के इंजीनियरों को लिखित में अवगत कराया था, इसको लेकर तीखी नोकझोंक भी हुई थी, लेकिन ध्यान नहीं दिया गया। तब से 300 मीटर सड़क स्थायी तालाब बन गई है।शिक्षकों और छात्र-छात्राओं का दर्द
गहरौली में विभिन्न शिक्षण संस्थानों में कार्यरत शिक्षक-कर्मचारी रोज पानी में घुसकर आने-जाने को मजबूर हैं। खरेला से सीधे गहरौली 10 KM है, लेकिन जलभराव के कारण मुस्करा होकर 13 KM अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ता है। रोज 26 किमी अतिरिक्त सफर।छात्राओं ने बताया दर्द:
रिवई निवासी अंजलि, डी फार्मा सेकंड ईयर ने बताया, “घुटने भर पानी में घुसकर कॉलेज जाना पड़ता है, ड्रेस खराब हो जाती है और कई बार समय पर क्लास नहीं पहुंच पाते।”
खरेला निवासी तनुश्री, डी फार्मा सेकंड ईयर ने बताया, “बरसात में सड़क बंद हो जाती है तो मुस्करा होकर जाना पड़ता है, ऑटो वाले दोगुना किराया वसूलते हैं, पढ़ाई का नुकसान होता है।”गहरौली स्थित स्व. पूरन राम प्रकाश दीक्षित फार्मेसी कॉलेज के सहायक प्रोफेसर अंकित बाजपेयी और फार्मेसी विभाग के टीचर सौरभ सिंह, महोबा ने बताया, “हम लोग रोज पानी में घुसकर आते-जाते हैं। पेट्रोल की महंगाई में रोज 26 किमी का अतिरिक्त चक्कर संभव नहीं है, धन और समय दोनों बर्बाद हो रहे हैं। छात्रों की उपस्थिति भी कम हो रही है।”गहरौली के पूर्व प्रधान बृजेंद्र कुमार गुरुदेव और किसान नेता राम रतन गुरुदेव ने बताया, “दर्जनों बार PWD से शिकायत की गई, पर आज तक सुनवाई नहीं हुई।”
ग्रामीणों की मांग
अंडरपास के पास नाली/कलवर्ट बनाकर जलभराव समाप्त किया जाए और 300 मीटर सड़क को तीन फीट ऊंचा कर मरम्मत कराई जाए।

.


