रामपुर जेल में तय होंगे वेस्ट यूपी के बेस्ट: कल आजम-अखिलेश का मंथन

रामपुर जेल में तय होंगे वेस्ट यूपी के बेस्ट: कल आजम-अखिलेश का मंथन

मुरादाबाद। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की तरफ से सपा नेता आजम खां के खिलाफ एक और एफआईआर के बाद सपा मुखिया अखिलेश यादव का 22 अक्तूबर का रामपुर दौरा राजनीतिक नजरिए से काफी अहम है। रामपुर जेल में सपा के दो दिग्गजों की छोटी सी मुलाकात विधानसभा चुनाव के लिहाज से बड़े फैसलों की बुनियाद भी डाल सकती है। इस बीच चुनाव के लिए पश्चिमी यूपी के संभावित चेहरों और सपा के चुनावी मुद्दों पर मंथन लगभग तय माना जा रहा है। विधानसभा चुनाव की बात करें तो मुरादाबाद मंडल ही नहीं पश्चिमी यूपी की अधिकांश सीटों पर सपा और आजम खां का प्रभाव नजर आता है। सपा शासन में मिनी मुख्यमंत्री कहे जाने वाले आजम खां भले ही लंबे समय से जेल में हैं और इस बीच के कुछ चुनावों में उनकी या उनके परिवार की सीधी हिस्सेदारी नहीं हो सकी लेकिन इसके बाद भी सपा के नीतिगत मामलों में उनका दखल और प्रभाव कम नहीं हुआ है। जेल बंदी के दौरान सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का समय-समय पर उनसे या उनके परिवार से मिलना भी पार्टी में उनके कद की अहमियत बताता है। पिछले (वर्ष 2022 के) विधानसभा चुनाव की बात करें तो टिकट के फैसलों से लेकर चुनाव संचालन तक सपा सुप्रीमो ने उनकी राय को तरजीह दी थी। इस चुनाव के नतीजों में पश्चिमी यूपी के दायरे में गिने जाने वाली 126 सीटों में से 41 पर सपा-रालोद गठबंधन ने जीत दर्ज की थी। इनमें से 33 सीटें सपा उम्मीदवारों के खाते में थीं।

मुरादाबाद मंडल की 27 सीटों में से 17 पर सपा हुई सफल
मुरादाबाद मंडल की 27 सीटों में से 17 पर सपा को सफलता मिली थी। मंडल में मुरादाबाद जिले की छह में से पांच सपा के पास आई थीं तो रामपुर में पांच में से तीन, संभल में चार में से तीन, अमरोहा में चार में से दो सपा के खाते में आईं। जबकि बिजनौर जिले की आठ में से चार सीटों पर सपा ने कब्जा जमाया था। इन सीटों की हार-जीत के पीछे तात्कालिक राजनीतिक समीकरण कुछ भी रहे हों लेकिन पश्चिमी यूपी के निर्वाचन क्षेत्र होने के कारण अधिकांश पर सफलता का सेहरा आजम खां के सिर बंधा था। आगामी विधानसभा चुनाव के लिए हर दल की सरगर्मी बढ़ चुकी है।

पश्चिमी यूपी के लिए सपा के उम्मीदवारों के नामों पर विचार विमर्श लगभग तय
जिताऊ प्रत्याशी की तलाश के लिए सपा और भाजपा प्राइवेट कंपनियों से सर्वे भी करा रही हैं। लिहाजा ऐसे समय में जेल में बंद आजम खां से सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की मुलाकात में पश्चिमी यूपी के लिए सपा के उम्मीदवारों के नामों पर विचार विमर्श लगभग तय है। जानकारों का अनुमान है कि इस मुलाकात में पश्चिमी यूपी के लिहाज से उन विषयों पर भी चर्चा हो सकती है, जिन्हें मुद्दा बनाकर सपा को चुनावी रुख अपनी ओर करने में मदद मिल सकती है। कहा जा रहा है कि आजम खां और उनके ड्रीम प्रोजेक्ट जौहर यूनिवर्सिटी पर कसा जांच एजेंसियों का शिकंजा और उसके छात्रों का लंबा आंदोलन सपा के लिए बड़ा मुद्दा हो सकता है। इसी तरह संभल में हरिहर मंदिर बनाम जामा मस्जिद के मुकदमे की शुरुआत के साथ भड़की हिंसा तथा हाल ही में सदन में पेश हुई उसकी न्यायिक जांच रिपोर्ट भी सपा चुनावी एजेंडे में ला सकती है।
गठबंधन की स्थिति में सीटों के बंटवारे पर भी संभव है चर्चा
रामपुर जेल में आजम खां से अखिलेश यादव की मुलाकात के दौरान संभावित सियासी चर्चाओं में चुनाव के समय गठबंधन की स्थिति और गठबंधन होने पर सीटों के बंटवारे का गणित भी एक विषय हो सकता है। अभी तक के परिदृश्य में विधानसभा चुनाव में सपा-कांग्रेस का साथ लगभग तय माना जा रहा है। अगर ऐसा होता है तो दोनों दलों के लिए बड़ी चुनौती सीटों के हिस्सा-बांट में होगी। कांग्रेस भले लंबे समय से सत्ता से दूर है लेकिन पश्चिमी यूपी की कई सीटों पर कांग्रेसी अपनी मजबूती का दावा करने में पीछे नहीं हैं। इन स्थितियों में सीटों के बंटवारे से लेकर चुनाव संचालन तक दोनों दलों के नेताओं में तालमेल बना पाना भी आसान नहीं होगा।
फिरोज खां, प्रभारी मुरादाबाद, शिक्षक एमएलसी चुनाव ने बताया कि रामपुर जेल में राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की आजम खां से मुलाकात होनी है। आजम खां की तबीयत भी खराब चल रही है। वह उनका हाल जानेंगे। दोनों पार्टी के बड़े नेता हैं। ये स्वभाविक है कि जब ये दोनों नेता मिलेंगे तो सियासी बातें भी होंगी। ये बातें किस पहलु पर होगी ये तो सिर्फ वही जानते होंगे या फिर परिवार के लोग।

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