अंतिम दिन बृहस्पतिवार को भी नहीं मिली मतदाता पर्ची

मुस्करा क्षेत्र के 1347 वोटर भगवान भरोसे, सोशल मीडिया के शेर जमीन पर ढेर – भाजपा के वोटर ने कहा “ना पर्ची दी, कम्युनिस्ट नेता के बेटे बोले अब तक कोई संपर्क नहीं गहरौली के वोटरों ने खोली पार्टियों की पोल – 23 अक्टूबर को वोटिंग, और 21 तक एक भी कार्यकर्ता नहीं पहुंचा वाटर के घर,, कृष्ण कुमार द्विवेदी। रियल मीडिया नेटवर्क। महोबा हमीरपुर में मजाक बना स्नातक एमएलसी चुनाव। मुस्करा ब्लॉक में सबसे खराब हालत है। शुक्रवार 23 अक्टूबर को वोटिंग है, लेकिन राजनीतिक दल बुधवार तक वोटर के घर तक ही नहीं पहुंच सका। जिसको लेकर मतदाता असमंजस में भी है। कुछ लोग नहीं पता वोट कहां पड़ेंगे।मुस्करा विकासखंड में कुल 1347 स्नातक मतदाता हैं, लेकिन भाजपा-सपा समेत किसी भी दल का कार्यकर्ता आज तक वोटर के दरवाजे तक नहीं पहुंचा। जबकि आज बुधवार शाम चुनाव प्रचार बंद हो चुका है और बृहस्पतिवार दोपहर बाद तक कोई पर्ची देने नहीं आया।।जनसंपर्क सिर्फ व्हाट्सएप और फेसबुक तक सीमित है।।। तीन वोटरों के बयानों ने पार्टियों की पोल खोल दी है।गहरौली निवासी वोटर ऋषभ कुमार ने बताया -“भारतीय जनता पार्टी को वोट करते चले आ रहे हैं। लेकिन ना तो किसी ने कोई पर्ची दी और ना किसी तरह कोई संपर्क किया जिससे यह पता चले की बोट कहां पड़ेंगे। राजनीतिक दलों के लिए बेहद चिंतनीय है।”_ये बयान भाजपा के बूथ मैनेजमेंट की हवा निकाल रहा है। जब अपना परंपरागत वोटर ही कह रहा है कोई पूछने नहीं आया, तो दूसरा वोटर कैसे जुड़ेगा?गहरौली के ही अजय कुमार त्रिपाठी ने बताया -“उनके घर में तीन वोट है लेकिन फिर भी किसी पार्टी ने संपर्क नहीं किया जिससे उन्हें यह भी पता नहीं है की वोटिंग कब होनी है।”_एक घर में तीन वोट का बोनस पैकेज है, फिर भी कोई संपर्क नहीं। जब एक ही छत के नीचे 3 वोटरों को तारीख नहीं पता, तो बाकी 1347 का क्या हाल होगा? यह बड़ा प्रश्न है। अब तीसरा बयान सबसे ज्यादा चर्चा में है। गहरौली निवासी कम्युनिस्ट पार्टी से विधानसभा चुनाव लड़ चुके भैया लाल गुरुदेव के पुत्र विकास कुमार गुरुदेव ने बताया -घर में किसी भी पार्टी के कार्यकर्तासंपर्क करने नहीं आए, केवल भारतीय जनता पार्टी केएक कार्यकर्ता का फोन आया था। इतना ही नहीं उनके कम से कम 8 से 10 और साथी हैं जिनसे भी किसी ने संपर्क अब तक नहीं किया।”_विकास का बयान बताता है कि सिर्फ एक-दो वोटर नहीं, पूरा ग्रुप ही इग्नोर हो रहा है। एक फोन कॉल को जनसंपर्क नहीं कहते। 8-10 स्नातक का ग्रुप मतलब 8-10 परिवार, यानी 80 से 100 वोटों पर सीधा असर। लेकिन किसी पार्टी को इसकी परवाह ही नहीं।*विधानसभा के लिए खतरे की घंटी*तीनों बयानों ने एक बात साफ कर दी – पार्टियां सोशल मीडिया पर शेर हैं, जमीन पर ढेर हैं।।सवाल अब MLC का नहीं, बल्कि विधानसभा 2027 का है। अगर विकासखंड क्षेत्र के 1347 स्नातक वोटरों तक नहीं पहुंच पा रहे, तो 2 लाख बिखरे वोटरों तक कैसे पहुंचोगे?।।प्रशासन तैयार है, लेकिन पार्टियां अभी भी सोशल मीडिया और ए सी में हैं अपने नजदीक चौराहे में एक फोटो खींचकर लोड कर दी और चुनाव प्रचार हो गया।

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