भरुआ सुमेरपुर। देश के लिए देशभक्तों की भूमिका के मद्देनजर वर्णिता संस्था के तत्वावधान में सुमेरपुर विमर्श विविधा के अन्तर्गत जिनका देश ॠणी है के तहत एक बेजोड़ बुन्देला शासक महाराजा छत्रसाल की जयंती पर श्रद्धांजलि देते हुए संस्था के अध्यक्ष डा. भवानीदीन ने कहा कि छत्रसाल सही अर्थों में संघर्षी अवधारणा के अग्रदूत थे। उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है। पुरोधत्व के कारण ही छत्रसाल बुन्देलखण्ड केसरी कहलाये। इन्होंने 1731 तक अपने जीवन के करीब आठ दशकों में हमेशा देश के लिए मुगल शासकों से युद्ध किया। औरंगजेब को पराजित किया, बुन्देलखण्ड में स्वतंत्र राज्य की स्थापना की। इनके राजनीतिक गुरु शिवाजी थे। इन्हें महाराजा की पदवी भी मिली। छत्रसाल ने बाजीराव प्रथम के साथ मिलकर बंगस को भी पराजित किया। इनके राज्य की राजधानी पन्ना थी। इनका जीवन काल 4 मई 1649 से लेकर 20 दिसम्बर 1731 तक रहा। इस कार्यक्रम में अशोक अवस्थी, आयुष शिवहरे, सन्तोष, महावीर, प्रिन्स, आशुतोष, विकास, रिचा, रामनरायन, मनबोधन, अजय, दस्सी आदि ने मौजूद रहकर श्रृद्धा सुमन अर्पित किये।
महाराजा छत्रसाल की जयंती पर वर्णिता ने दी श्रद्धांजलि
