रियल मीडिया नेटवर्क
भरुआ सुमेरपुर। देशभक्तों की देश के प्रति वफादारी के मद्देनजर वर्णिता संस्था के तत्वावधान में विमर्श विविधा के अन्तर्गत जिनका देश ऋणी है के तहत मुगल काल के एक बेमिसाल मेवाड़ सूरमा महाराणा प्रताप की जयंती पर संस्था के अध्यक्ष डा. भवानीदीन ने श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए कहा कि महाराणा प्रताप वस्तुतः मातृभूमि के एक सच्चे रखवाले थे। इनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है। इनका जन्म 9 मई 1540 को उदय सिंह और जयवन्ता बाई के घर कुम्भल गढ़ में हुआ था। इनके समय में अकबर का शासन था। 1576 का हल्दी घाटी का युद्ध महाराणा प्रताप और अकबर के मध्य भीषण रूप में हुआ था। जिसमें जख्मी होने के बावजूद इन्होंने हार नहीं मानी। इस पर मतभिन्नता होने के बावजूद इनकी बहादुरी को मुगलों ने भी सराहा। हालांकि यहां मुगलों की विजय हुई। लेकिन महाराणा प्रताप ने अपनी रणनीति के बल पर पुनः मेवाड़ को फतह कर लिया। आगे चलकर 19 जनवरी 1597 को इनका निधन हो गया। कार्यक्रम में अशोक अवस्थी, पंकज सिंह, रिचा, संतोष, प्रेम, सागर, महावीर, आशुतोष, विकास, रामनरायन, मनबोधन, दस्सी, अजय आदि शामिल रहे।
महाराणा प्रताप की मनी जयंती
