गांजा चरस की गिरफ्त में “उडता राठ”नशे का गली गली कारोबार


रियल मीडिया नेटवर्क
राठ हमीरपुर।राठ कस्बा इन दिनों मादक पदार्थों की बेलगाम बिक्री और उससे उपजे अपराधों के चलते गंभीर सामाजिक संकट से गुजर रहा है। मदिरा की बढ़ती कीमतों के कारण अब गांजे की खपत में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। चौंकाने वाली बात यह है कि यह सब आबकारी विभाग की निष्क्रियता के बीच हो रहा है, जिससे पूरे क्षेत्र में चोरी, टप्पेबाजी और छिनैती जैसी घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि राठ अब नशे के सौदागरों का सुरक्षित अड्डा बनता जा रहा है। देशी, विदेशी और महुआ से बनी कच्ची शराब के अलावा पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश से आने वाली शराब भी खुलेआम बिक रही है।
महंगी ब्रांडेड शराब आम युवाओं की पहुंच से बाहर होने के कारण अब वे गांजे जैसे सस्ते विकल्पों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। गांजा अब राठ के मोहल्लों, गलियों और चौराहों तक पर सहज रूप से उपलब्ध है।
इसका सीधा असर नगर की कानून व्यवस्था पर देखा जा रहा है। लगातार हो रही चोरियों, छीना-झपटी और टप्पेबाजी की घटनाओं से आमजन में दहशत का माहौल है। गुटखा, साबुन, सिगरेट और सूखे मेवों जैसी दैनिक उपयोग की वस्तुएं तक चोरी हो रही हैं। बावजूद इसके न तो आबकारी विभाग और न ही पुलिस प्रशासन इस दिशा में कोई ठोस कदम उठाता दिख रहा है। कोतवाली पुलिस भी सीमित संसाधनों और स्टाफ की कमी से जूझ रही है। उनका तर्क है कि मादक पदार्थों की रोकथाम मुख्यतः आबकारी विभाग की जिम्मेदारी है, जबकि वे पहले से ही अपराध नियंत्रण और अन्य कानून व्यवस्था संबंधी कार्यों में व्यस्त हैं।
लगभग दो माह पूर्व भाजपा के एक वरिष्ठ नेता के साथ कुछ नशे में धुत युवकों द्वारा की गई अभद्रता की घटना ने भी पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं। शिकायत दर्ज होने के बावजूद दोषियों के विरुद्ध कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई।स्थानीय जागरूक नागरिकों का मानना है कि यदि प्रशासनिक इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो पुलिस और आबकारी विभाग मिलकर इस बढ़ती अराजकता पर नियंत्रण पा सकते हैं। समय रहते कार्रवाई न की गई, तो राठ का सामाजिक ढांचा पूरी तरह चरमरा सकता है।

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