गुटबाजी के गर्त में भाजपा, हमीरपुर और राठ में टुकडों में बंटा संगठन


जगदीश श्रीवास्तव विशेष संवाददाता
हमीरपुर (राठ)—-केंद्र और प्रदेश में वर्षों से सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के भीतर अब भी सब कुछ सामान्य नहीं दिख रहा है। हमीरपुर जनपद और उसके नगर राठ में संगठनात्मक स्तर पर गुटबाज़ी और अंतर्विरोध स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता और वरिष्ठ नेता इस स्थिति से चिंतित हैं कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो इसका प्रतिकूल असर आगामी विधानसभा चुनावों पर पड़ सकता है।
भाजपा के प्रदेश नेतृत्व ने हाल ही में बहुतेरे जिलों के अध्यक्षों की घोषणा की, लेकिन हमीरपुर जनपद को इस सूची से बाहर रखा गया। सूत्रों के अनुसार, जिले में जिला अध्यक्ष पद को लेकर कई प्रभावशाली नेताओं के बीच रस्साकशी जारी है। हर खेमे की कोशिश है कि उसका करीबी इस पद पर नियुक्त हो।
प्रदेश नेतृत्व की असमर्थता का आलम यह है कि न केवल हमीरपुर का जिला अध्यक्ष, बल्कि राठ मंडल अध्यक्ष की नियुक्ति भी अब तक नहीं हो सकी है। संगठन के सूत्रों का कहना है कि नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति के बाद इस दिशा में कोई ठोस निर्णय हो सकता है।
राजनीतिक मतभेद और आपसी ईर्ष्या का एक ताजा उदाहरण हाल ही में राठ नगर में देवी अहिल्याबाई होल्कर की जयंती पर आयोजित समारोह में देखने को मिला। स्थानीय तिरुपति रिसोर्ट में आयोजित कार्यक्रम में नगर मंडल अध्यक्ष महेंद्र शुक्ला को मंच पर स्थान नहीं दिया गया, जबकि कई अन्य स्थानीय नेताओं को देर से आने के बावजूद सम्मानपूर्वक मंच पर बैठाया गया।
इस स्थिति को लेकर पार्टी के भीतर चर्चा तेज है। आयोजन समिति के प्रमुख रविंद्र शर्मा ने सफाई देते हुए कहा कि यह महिला-केंद्रित कार्यक्रम था और उन्हें मंच व्यवस्था की पूरी जानकारी नहीं थी। हालांकि, कार्यक्रम में कई पुरुष नेता भी मंच पर उपस्थित थे, जिससे यह स्पष्टीकरण सवालों के घेरे में आ गया।
भाजपा के समर्पित कार्यकर्ता और परंपरागत समर्थक इस प्रकार की गुटबाजी और उपेक्षा की घटनाओं से आहत हैं। उनका मानना है कि यदि ऐसे हालात बने रहे, तो इसका खामियाजा आगामी चुनाव में पार्टी को भुगतना पड़ सकता है।
नगर मंडल अध्यक्ष महेंद्र शुक्ला ने इसे व्यक्तिगत मुद्दा मानने से इनकार करते हुए कहा कि, “यह मेरे लिए कोई विशेष विषय नहीं है, फिर भी संगठन स्तर पर इसकी समीक्षा की जा चुकी है।”
राठ और हमीरपुर में पार्टी के भीतर अंतर्विरोध और गुटबाजी भाजपा के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभर रही है। यदि पार्टी नेतृत्व समय रहते हस्तक्षेप कर संगठन में सामंजस्य नहीं स्थापित करता, तो यह आगामी चुनावों में नकारात्मक परिणाम का कारण बन सकता है। संगठन को चाहिए कि वह व्यक्तिगत अहं को दरकिनार कर, सामूहिक उद्देश्य की ओर ध्यान केंद्रित करे, ताकि पार्टी की जड़ें और अधिक मजबूत हो सकें।

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