कानपुर। कानपुर जिले में गैस सिलिंडर की किल्लत और एजेंसी संचालकों की मनमानी से परेशान जनता को राहत देने में जिला पूर्ति विभाग पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है। हालात यह हैं कि रोज 20 हजार से अधिक उपभोक्ता गैस के लिए बीते एक सप्ताह से सुबह से लेकर शाम तक एजेंसियों के बाहर लाइन लगा रहे हैं। वहीं इनकी समस्याओं के निस्तारण में लगाए पूर्ति निरीक्षक और पूर्ति लिपिक फोन बंदकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं। अमेरिका, इस्राइल-ईरान युद्ध के चलते जिले में एलपीजी गैस का संकट बढ़ गया है। इसको देखते हुए 11 मार्च को अपर जिलाधिकारी (आपूर्ति) की ओर से गैस से जुड़ी शिकायतों के निस्तारण के लिए तीन शिफ्ट में तीन टीमें गठित की गई थीं। एक टीम में दो-दो लोगों को तैनात किया था। सुबह सात बजे से रात्रि 11 बजे तक गैस संबंधित आने वाली समस्याओं के निस्तारण के लिए जिम्मेदारी तय की थी। इसके लिखित आदेश जारी कर अधिकारियों और कर्मचारियों के मोबाइल नंबर भी सार्वजनिक किए गए थे ताकि लोग सीधे अपनी शिकायत दर्ज करा सकें। अगले दिन जैसे ही लोगों ने इन नंबरों पर शिकायत के लिए फोन करना शुरू किया तो अधिकांश नंबर या तो लगातार बंद मिले या फिर किसी ने फोन उठाने की जहमत ही नहीं उठाई। इधर पूर्ति विभाग की ओर से जारी किए गए कंट्रोल रूम नंबर ( 05122988763) और व्हाट्सएप नंबर (6394616122) भी औपचारिकता बनकर रह गए। कुछ शिकायतें सुनने के बाद निस्तारण के नाम पर खानापूरी करने से बड़ी संख्या में शिकायतें लंबित रह गईं। शनिवार को शिकायतों और नाराजगी का दबाव बढ़ा तो अपर जिलाधिकारी (आपूर्ति) राजेश कुमार ने नया पत्र जारी करके कहा कि पहले जारी नंबर कंट्रोल रूम के नहीं बल्कि अधिकारियों के व्यक्तिगत नंबर थे। इसलिए शिकायतें कंट्रोल रूम के नंबर पर ही दर्ज कराई जाएं। उस पर लगातार लोगों की समस्याओं का निस्तारण किया जा रहा है।
कानपुर गैस संकट: हेल्प डेस्क के नाम पर जनता से मजाक
