प्रेस फ्रीडम इंडेक्स पर भारत की रैंकिंग पर चिंता, पत्रकारों की सुरक्षा पर उठे सवाल

  • विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस पर सीजेए के राष्ट्रीय महासचिव शीबू खान का बड़ा बयान

फतेहपुर। विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर साइबर जर्नलिस्ट एसोसिएशन के राष्ट्रीय महासचिव शीबू खान ने प्रेस की आज़ादी और पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि प्रेस फ्रीडम इंडेक्स 2026 की रिपोर्ट के अनुसार 180 देशों की सूची में भारत का 157वां स्थान होना लोकतंत्र के लिए चिंताजनक संकेत है।
शीबू खान ने अपने संबोधन में कहा कि प्रेस लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है, लेकिन वर्तमान समय में इसकी स्वतंत्रता और निष्पक्षता कई चुनौतियों का सामना कर रही है। उन्होंने कहा, “भारत जैसे बड़े लोकतांत्रिक देश का इस तरह पीछे जाना यह दर्शाता है कि हमें प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर गंभीर आत्ममंथन करने की आवश्यकता है।”,उन्होंने विशेष रूप से पत्रकारों की सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि देश में पत्रकारों पर हमले, धमकियां और उत्पीड़न की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। उन्होंने आगे कहा कि पत्रकार कतई सुरक्षित नहीं हैं, और यह स्थिति बेहद गंभीर है। शासन और प्रशासन को इसे समझते हुए ठोस कदम उठाने होंगे। शीबू खान ने यह भी कहा कि डिजिटल युग में साइबर पत्रकारिता तेजी से उभरी है, लेकिन इसके साथ ही फेक न्यूज़, ट्रोलिंग और ऑनलाइन उत्पीड़न जैसी समस्याएं भी बढ़ी हैं। उन्होंने सरकार से अपील की कि पत्रकारों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रभावी कानून और सुरक्षा तंत्र विकसित किया जाए। उन्होंने आगे कहा कि प्रेस की स्वतंत्रता केवल मीडिया तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आम जनता की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से भी जुड़ी हुई है और अगर पत्रकार स्वतंत्र और सुरक्षित नहीं होंगे, तो जनता की आवाज़ भी दब जाएगी। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने सभी मीडिया संस्थानों, पत्रकारों और नागरिकों से अपील की है कि वे एकजुट होकर प्रेस की आज़ादी और लोकतंत्र की मजबूती के लिए काम करें।

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